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राघव चड्ढा का ‘चाय न्योता’ भी नहीं डिगा पाया सीचेवाल को, पंजाब में AAP का एकमात्र सांसद बचा अलग राह पर

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राजनीति / पंजाब | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/चंडीगढ़ | 26 अप्रैल 2026

आम आदमी पार्टी में हालिया राजनीतिक उठापटक के बीच एक दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पंजाब की राजनीति को नई दिशा दे दी है। राघव चड्ढा समेत कुल 7 राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद जहां सियासी हलचल तेज हुई, वहीं पंजाब से आने वाले एकमात्र सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने बागी खेमे से दूरी बनाकर सबको चौंका दिया है।

जानकारी के मुताबिक, बागी समूह की ओर से बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया गया था और उन्हें इस नए राजनीतिक प्रयास में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था। खुद सीचेवाल ने बताया कि उन्हें फोन कर एक स्वतंत्र समूह बनाने की बात कही गई थी और इस पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया। उनका कहना था कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी और वे इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।

इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया—‘चाय का न्योता’। सीचेवाल ने खुलासा किया कि संसद सत्र के दौरान राघव चड्ढा की ओर से उन्हें चाय पर चर्चा के लिए बुलाया गया था। हालांकि उन्होंने इस न्योते को भी ठुकरा दिया और साफ संकेत दिया कि वे किसी भी तरह की राजनीतिक रणनीति या खेमेबाजी से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।

सीचेवाल ने बातचीत में यह भी कहा कि पंजाब में राघव चड्ढा और संदीप पाठक की भूमिका काफी अहम रही है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के पास राज्य स्तर की बड़ी जिम्मेदारियां थीं और वे लंबे समय तक प्रशासनिक और संगठनात्मक फैसलों में प्रभावी रहे। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना कई सवाल खड़े करता है।

चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित ‘हाउस नंबर 50’ का जिक्र भी इस पूरे मामले में सामने आया, जिसे पंजाब की राजनीति में एक अहम केंद्र माना जाता रहा है। सीचेवाल के मुताबिक, कई प्रशासनिक फैसलों पर भी इस जगह का प्रभाव देखा जाता था।पंजाब की राजनीति में यह घटनाक्रम एक नए मोड़ का संकेत दे रहा है। जहां एक ओर बड़े पैमाने पर दल-बदल हुआ, वहीं बलबीर सिंह सीचेवाल का अलग रुख यह दिखाता है कि हर नेता इस सियासी बदलाव के साथ खड़ा नहीं है। आने वाले समय में इसका असर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर देखने को मिल सकता है।

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