अंतरराष्ट्रीय डेस्क 10 दिसंबर 2025
यूरोप में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक ऐसे स्पर्म डोनर का शुक्राणु (sperm) कई देशों की क्लीनिकों में इस्तेमाल किया गया, जिसके शरीर में एक ऐसा जीन था जो कैंसर होने का खतरा बहुत बढ़ा देता है। इस डोनर के स्पर्म की मदद से पिछले 17 साल में कम से कम 197 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें से कई बच्चों में कैंसर हो चुका है और कुछ बच्चों की मौत भी हो चुकी है। कुछ भारतीय मूल के परिवार भी प्रभावित हुए हैं।
सबसे डरावनी बात यह है कि डोनर को खुद नहीं पता था कि उसके कुछ स्पर्म में यह खतरनाक जीन मौजूद है। उसका शरीर सामान्य था और वह पूरी तरह स्वस्थ है। लेकिन उसके लगभग 20% स्पर्म में TP53 नाम का एक खराब जीन था। यह जीन शरीर में कैंसर बनने से रोकने का काम करता है। अगर यह खराब हो जाए तो इंसान में पूरी जिंदगी कैंसर का खतरा 90% तक बढ़ जाता है, खासकर बचपन में ही कैंसर होने का डर रहता है। इस बीमारी को Li-Fraumeni Syndrome कहा जाता है।
यह डोनर 2005 में एक छात्र था, जब उसने पैसे कमाने के लिए स्पर्म डोनेट करना शुरू किया। उसके स्पर्म को यूरोप के करीब 14 देशों की 67 फ़र्टिलिटी क्लीनिकों ने इस्तेमाल किया। किसी को यह नहीं पता था कि उसमें यह खतरनाक जीन मौजूद है। इस वजह से कई महिलाओं को वह स्पर्म दिया गया, और कई बच्चे पैदा हुए—जिनमें से कुछ अब बहुत गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। कुछ को तो बचपन में दो-दो तरह के कैंसर हो चुके हैं।
कई परिवार टूट गए—कुछ बच्चों की मौत हो चुकी है
फ्रांस की एक मां, जिनका नाम गुप्त रखा गया है, ने बताया कि उनकी 14 साल की बेटी इसी स्पर्म से पैदा हुई है और उसके शरीर में यह खतरनाक जीन मौजूद है। जब क्लीनिक ने उन्हें फोन कर यह बताया कि उनकी बच्ची को कैंसर का खतरा है, तो वह सदमे में आ गईं। उन्होंने कहा—
“मुझे डोनर से कोई गुस्सा नहीं है, लेकिन मुझे ऐसा स्पर्म दिया ही क्यों गया जो सुरक्षित नहीं था?”
डॉक्टरों ने बताया कि अब इन बच्चों को हर साल पूरे शरीर और दिमाग के MRI स्कैन कराने होंगे। महिलाओं को बाद में अपने स्तनों को हटाने का फैसला भी करना पड़ सकता है, ताकि कैंसर का जोखिम कम किया जा सके।
सबसे दुखद हिस्सा यह है कि कुछ बच्चे इस बीमारी से लड़ते हुए बहुत कम उम्र में ही मर चुके हैं।
स्पर्म बैंक की गलती: कई देशों में लिमिट से ज्यादा बार इस्तेमाल
यूरोप के नियम कहते हैं कि एक डोनर का स्पर्म सीमित परिवारों में इस्तेमाल होना चाहिए। उदाहरण के लिए—
बेल्जियम में नियम है: 1 डोनर = अधिकतम 6 परिवार
लेकिन यहां इस डोनर के स्पर्म का इस्तेमाल 38 महिलाओं के लिए किया गया और 53 बच्चे पैदा हो गए।
यह सीमा इसलिए होती है कि किसी बीमारी का खतरा ज्यादा न फैले और भविष्य में सैंकड़ों बच्चे एक ही डोनर से आधे भाई-बहन न बन जाएँ। लेकिन इस मामले में नियम पूरी तरह टूट गए।
यूरोपियन स्पर्म बैंक ने गलती स्वीकार की है और कहा है कि उन्होंने बहुत ज्यादा बार एक ही डोनर के स्पर्म का इस्तेमाल कर लिया।
ब्रिटेन और दूसरे देश भी चिंतित—कुछ भारतीय मूल के परिवार भी प्रभावित हो सकते हैं
स्पर्म UK में नहीं बेचा गया, लेकिन कई ब्रिटिश महिलाएँ डेनमार्क जाकर IVF कराती हैं। ऐसे कुछ ब्रिटिश परिवारों को यह सूचित किया गया है कि वे इस डोनर के स्पर्म से गर्भवती हुई थीं।
अभी यह साफ नहीं है कि क्या किसी अन्य देश की महिलाएँ, जैसे भारत मूल की महिलाएँ, इस प्रक्रिया का हिस्सा रही हों। जो भी चिंतित है, उन्हें अपनी क्लीनिक से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टरों का कहना: हर बीमारी की पहले से जांच करना संभव नहीं
UK के विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही यह घटना दुखद है, लेकिन दुनिया में कोई भी टेस्ट 100% सुरक्षित स्पर्म की गारंटी नहीं दे सकता। दुनिया भर में केवल 1–2% ही पुरुष डोनर के रूप में पास होते हैं। अगर नियम और सख्त किए जाएँ, तो स्पर्म डोनर मिलना ही मुश्किल हो जाएगा।
यह मामला दुनिया के लिए चेतावनी है
यह घटना दिखाती है कि फ़र्टिलिटी इंडस्ट्री में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियमों की कितनी कमी है। एक डोनर से सैंकड़ों बच्चों का जन्म होना खतरनाक भी है और बच्चों की मानसिक स्थिति पर भी असर डाल सकता है, जब उन्हें पता चलेगा कि उनके सैकड़ों “हाफ-सिब्लिंग्स” हैं। लेकिन विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ऐसे मामले बहुत दुर्लभ हैं, और लाइसेंस प्राप्त क्लीनिक में इलाज करवाना अभी भी सुरक्षित है।




