एबीसी डेस्क 22 दिसंबर 2025
भारत के सबसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में शामिल अरुणाचल प्रदेश एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है यहां एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा, जिसने केंद्र सरकार से लेकर सुरक्षा एजेंसियों तक की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान से जुड़े पाए गए हैं, जबकि चीन की भूमिका की आशंका भी जताई जा रही है।
अरुणाचल प्रदेश आज़ादी के बाद से ही भारत और चीन के बीच विवाद का केंद्र रहा है। चीन इस राज्य को लगातार “दक्षिण तिब्बत” बताता रहा है, जगहों के नाम बदलने से लेकर भारतीय नेताओं की यात्राओं पर आपत्ति तक जताता रहा है। अब इसी संवेदनशील इलाके में जासूसी नेटवर्क के सामने आने से हालात और गंभीर हो गए हैं।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी हलचल
अरुणाचल प्रदेश की 1,126 किलोमीटर लंबी सीमा चीन के कब्जे वाले तिब्बत से और 520 किलोमीटर सीमा म्यांमार से लगती है। दुर्गम पहाड़ों और घने जंगलों वाला यह इलाका पहले भी चीनी घुसपैठ, स्थानीय युवकों के अपहरण और तनाव की घटनाओं का गवाह रहा है। बीते कुछ वर्षों में चीन ने सीमा के उस पार सड़कें, बुलेट ट्रेन, नई बस्तियां और सैन्य ढांचा तेजी से खड़ा किया है।
अब स्थानीय लोगों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास चीनी सेना की गतिविधियों में तेज़ी की सूचना दी है। अंजाव जिले के कपापू इलाके में चीनी सेना के कई शिविर बनाए जाने की बात सामने आई है। सेना के सूत्रों के अनुसार, चीन ने मैकमोहन लाइन से 40 किलोमीटर के दायरे में फाइटर जेट तैनात किए हैं और तिब्बत के ल्हूंजे एयरबेस पर स्थायी हैंगर भी बनाए गए हैं।
कैसे हुआ जासूसी नेटवर्क का खुलासा
सुरक्षा एजेंसियों ने 11 दिसंबर को इटानगर से दो कश्मीरी युवकों—नजीर अहमद मलिक और सबीर अहमद मीर—को गिरफ्तार किया। दोनों खुद को कंबल विक्रेता बताकर अरुणाचल में रह रहे थे। जांच में सामने आया कि वे एनक्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के जरिए पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में थे। उन पर सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां भेजने, अवैध घुसपैठ में मदद और हथियार तस्करी से जुड़े निर्देश लेने का आरोप है।
इनसे पूछताछ के बाद दो और कश्मीरी युवकों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद असम के तेजपुर से भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलेंद्र शर्मा को भी हिरासत में लिया गया। एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ अरुणाचल तक सीमित नहीं, बल्कि असम तक फैला हुआ है।
‘हाइब्रिड वॉर’ की साजिश?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने स्थानीय युवकों को साथ मिलाकर स्लीपर सेल बनाने की कोशिश की थी। शुरुआती संकेत इस ओर इशारा कर रहे हैं कि यह पूरा नेटवर्क पाकिस्तान और चीन की साझा रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञ इसे ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ बताते हैं, जिसमें जासूसी, घुसपैठ और सैन्य दबाव के जरिए किसी देश को अस्थिर करने की कोशिश की जाती है।
सरकार और विशेषज्ञों की चिंता
अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नातूंग ने साफ कहा है कि इस मामले में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। “राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी,” उन्होंने कहा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी भारी सैन्य और सुरक्षा मौजूदगी के बावजूद इस तरह के नेटवर्क का पनपना गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन पूर्वोत्तर में अस्थिरता पैदा कर भारत पर दबाव बनाना चाहता है, और इसके लिए वह पाकिस्तान की मदद से अंदरूनी पैठ की कोशिश कर रहा है।
सुरक्षा और सतर्कता बढ़ी
नेटवर्क के खुलासे के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संदिग्धों की पहचान के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चल रहा है। एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ से और भी अहम जानकारियां सामने आएंगी।
अरुणाचल प्रदेश में सामने आया यह मामला सिर्फ एक जासूसी गिरोह का नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले पर देश की नजरें टिकी रहेंगी।




