एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 25 फरवरी 2026
जेफरी एपस्टीन से जुड़ी चर्चित फाइलों को लेकर देश की राजनीति में जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए विदेश नीति की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। खेड़ा का दावा है कि सार्वजनिक रूप से सामने आए कुछ ईमेल संवाद और संपर्क यह संकेत देते हैं कि एपस्टीन के नेटवर्क का उल्लेख भारत-इजरायल संबंधों तथा कुछ कूटनीतिक संपर्कों के संदर्भ में आता है, जिससे कई संदेह पैदा होते हैं।
रोबोट टिप्पणी के बहाने सीधा राजनीतिक निशाना
पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री के बचपन में रोबोट बनाने संबंधी बयान का जिक्र करते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणी की और कहा कि विपक्ष इसे प्रतीकात्मक रूप से निर्णय प्रक्रिया और विदेशी प्रभाव के सवालों से जोड़कर देख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और बैठकों को लेकर सरकार ने पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी, जिससे राजनीतिक विवाद और गहरा हुआ है।
बैक-चैनल कूटनीति के आरोप
खेड़ा ने 2017 के दौरान कथित ईमेल संपर्कों और मुलाकातों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि कुछ व्यावसायिक और कूटनीतिक संवादों में एपस्टीन का नाम क्यों सामने आता है। उनके अनुसार यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसे संपर्क किन उद्देश्यों से और किस आधिकारिक प्रक्रिया के तहत स्थापित किए गए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि किसी स्तर पर गैर-औपचारिक या बैक-चैनल संपर्क हुए, तो इससे संस्थागत कूटनीति और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
भारत-इजरायल संबंधों को लेकर भी उठे सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि 2014 के बाद भारत-इजरायल रक्षा और रणनीतिक सहयोग में आई तेजी को विपक्ष एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में देख रहा है। उन्होंने विभिन्न रक्षा सौदों और तकनीकी सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समझौतों की प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे।
सरकार का जवाब
सरकार से जुड़े नेताओं और सूत्रों ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है। उनका कहना है कि जिन संपर्कों का उल्लेख किया जा रहा है, वे पेशेवर और सामान्य संवाद की श्रेणी में आते हैं तथा उनका किसी अनुचित गतिविधि से संबंध नहीं है।
सरकारी पक्ष के अनुसार भारत-इजरायल संबंध दशकों से रणनीतिक हितों, रक्षा सहयोग, कृषि, तकनीक और नवाचार पर आधारित रहे हैं और उन्हें किसी एक व्यक्ति या आरोप से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक तीखी बहस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश नीति, रक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संपर्क जैसे मुद्दे चुनावी दौर में तेजी से राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन जाते हैं। ऐसे मामलों में आरोप और जवाब के बीच तथ्यात्मक स्पष्टता तथा आधिकारिक पारदर्शिता सार्वजनिक विश्वास के लिए अहम मानी जाती है।
फिलहाल एपस्टीन फाइल्स को लेकर कांग्रेस के आरोपों और सरकार के खंडन के बीच राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और संभावित स्पष्टीकरण सामने आने की संभावना जताई जा रही है।




