एबीसी नेशनल न्यूज | वॉशिंगटन | 10 फरवरी 2026
कुख्यात यौन अपराधी Jeffrey Epstein से जुड़े मामले में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एप्सटीन की करीबी सहयोगी Ghislaine Maxwell ने अमेरिकी संसद की House Committee on Oversight and Government Reform के सामने हुई डिपॉजिशन के दौरान पूछे गए अहम सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। उनके इस रवैये को लेकर डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन—दोनों दलों के सांसदों ने तीखी नाराज़गी जताई है और इसे सार्वजनिक जवाबदेही के खिलाफ बताया है।
कांग्रेस सदस्यों के मुताबिक, समिति एप्सटीन नेटवर्क, उसके प्रभावशाली संपर्कों और संभावित संस्थागत संरक्षण की परतें खोलने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मैक्सवेल ने अधिकांश सवालों पर चुप्पी साध ली और कानूनी अधिकारों का हवाला देकर जवाब देने से बचती रहीं। सांसदों का कहना है कि यह रुख सच्चाई तक पहुंचने की प्रक्रिया को बाधित करता है और जनता के मन में पहले से मौजूद संदेह को और गहरा करता है—खासकर तब, जब मामला शक्तिशाली लोगों और संस्थाओं से जुड़ा हो सकता है।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट—दोनों खेमों के सदस्यों ने एक सुर में कहा कि यह प्रकरण केवल व्यक्तिगत अपराधों तक सीमित नहीं है। यह उस तंत्र की पड़ताल का मामला है, जिसने वर्षों तक एप्सटीन जैसे व्यक्ति को पनपने दिया। समिति के एक वरिष्ठ सदस्य ने टिप्पणी की कि “जब प्रमुख गवाह ही सवालों से बचते हैं, तो यह लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए बेहद खतरनाक संकेत होता है।”
डेमोक्रेट सांसदों ने जोर देकर कहा कि पीड़ितों को न्याय तभी मिलेगा, जब पूरे नेटवर्क और उसकी संरक्षकता पर रोशनी पड़ेगी। वहीं रिपब्लिकन सदस्यों ने दोहराया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि मैक्सवेल के पास प्रासंगिक जानकारी है, तो उसे सार्वजनिक हित में सामने आना चाहिए। दोनों दलों ने समिति की जांच को और सख्त व व्यापक बनाने की मांग भी उठाई है।
गौरतलब है कि एप्सटीन मामला लंबे समय से अमेरिकी सत्ता, धन और अपराध के खतरनाक गठजोड़ का प्रतीक बन चुका है। एप्सटीन की मौत के बाद भी यह सवाल अनुत्तरित हैं कि उसके नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और किन लोगों को अब तक जवाबदेही से बचाया गया। मैक्सवेल को इस नेटवर्क की अहम कड़ी माना जाता है—ऐसे में उनका सवालों से बचना मामले को और संवेदनशील तथा विवादास्पद बना देता है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस डिपॉजिशन के बाद अमेरिकी राजनीति और न्यायिक संस्थानों पर दबाव बढ़ेगा। कांग्रेस के सामने चुनौती है कि वह औपचारिक सुनवाइयों से आगे बढ़कर उन संरचनाओं को भी उजागर करे, जिन्होंने वर्षों तक ऐसे अपराधों को संरक्षण दिया। फिलहाल, मैक्सवेल की चुप्पी यह संकेत देती है कि एप्सटीन प्रकरण अभी खत्म नहीं हुआ है—इसके कई काले सच सामने आना बाकी हैं।




