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I-PAC प्रमुख के घर पहुंचीं ममता बनर्जी

ED की रेड या सत्ता की साजिश? I-PAC प्रमुख के घर पहुंचीं ममता बनर्जी, अमित शाह पर तीखा वार—“क्या यही गृह मंत्री का काम है?”

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अरिंदम बनर्जी 8 जनवरी 2026

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर एक साथ छापेमारी के बाद देश की राजनीति में जबरदस्त उबाल आ गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और केंद्र सरकार पर खुला, तीखा और सीधा हमला बोला। ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को “कानून नहीं, राजनीति से प्रेरित रेड” करार देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया—“क्या विपक्ष को डराना अब गृह मंत्री की जिम्मेदारी बन गई है?”

ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि ED और CBI जैसी संवैधानिक संस्थाओं को बीजेपी सरकार ने पूरी तरह राजनीतिक हथियार में बदल दिया है। उनका आरोप है कि जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं या विपक्ष मजबूत होता है, वैसे ही जांच एजेंसियों को आगे कर दिया जाता है। ममता ने कहा कि I-PAC कोई अपराधी संगठन नहीं, बल्कि एक पेशेवर राजनीतिक रणनीति संस्था है, फिर भी उसे निशाना बनाना यह साबित करता है कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा से डरती है।

मुख्यमंत्री ने अमित शाह को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि अगर ED वाकई स्वतंत्र एजेंसी है, तो उसकी हर बड़ी कार्रवाई का समय चुनाव और राजनीतिक घटनाओं से ही क्यों जुड़ा होता है? ममता बनर्जी ने तीखे लहजे में कहा, “आप लोकतंत्र से डरते हैं, इसलिए एजेंसियों के पीछे छुपकर हमला करते हैं। लेकिन याद रखिए—तृणमूल कांग्रेस न डरती है, न झुकती है।”

घटनास्थल पर ममता बनर्जी की मौजूदगी सिर्फ औपचारिक समर्थन नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को खुली चुनौती के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने साफ कर दिया कि बंगाल को डराकर चुप नहीं कराया जा सकता। अगर जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को सड़कों से लेकर संसद तक उठाया जाएगा। ममता ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति या संस्था की नहीं, बल्कि संघीय ढांचे और लोकतंत्र की आत्मा को बचाने की है।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी ED की इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार विपक्ष से जुड़े रणनीतिकारों, नेताओं और संस्थाओं को टारगेट कर डर का माहौल बनाना चाहती है, ताकि आने वाले चुनावों में विरोध की आवाज कमजोर की जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या देश की जांच एजेंसियां निष्पक्ष रूप से कानून के तहत काम कर रही हैं, या फिर वे सत्ताधारी दल के इशारों पर विपक्ष को कुचलने का औजार बन चुकी हैं? ममता बनर्जी का आक्रामक रुख साफ संकेत देता है कि यह टकराव अब सिर्फ ED की रेड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि केंद्र बनाम संघीय लोकतंत्र की बड़ी लड़ाई का रूप ले चुका है।

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