आलोक कुमार | नई दिल्ली 21 नवंबर 2025
विवादों और राजनीतिक घमासानों के केंद्र में रहे व्यवसायी और प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा की परेशानियां एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसके बाद मामला एक साधारण जमीन सौदे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों, विदेशी लेन-देन और मनी-लॉन्ड्रिंग की गहराई तक पहुँच गया है। यह चार्जशीट दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में दायर की गई है, जो बताती है कि जांच अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और ईडी वाड्रा की भूमिका को प्रत्यक्ष रूप से अपराध में शामिल बता रहा है।
ईडी की चार्जशीट के केंद्र में ब्रिटेन में स्थित एक कथित संपत्ति—लंदन के 12 ब्रायनस्टन स्क्वेयर—का जिक्र है, जिसे कथित रूप से अवैध धन से खरीदा और नवीनीकृत किया गया बताया गया है। यह पूरा मामला यूके-आधारित रक्षा सलाहकार संजय भंडारी से जुड़ा है, जिसके यहां 2016 में हुई आयकर छापेमारी में कई ऐसे दस्तावेज मिले थे, जिनमें वाड्रा का नाम और इस संपत्ति के सुधार-कार्य का सीधे उल्लेख पाया गया। ईडी का आरोप है कि इस पूरी गतिविधि में वाड्रा की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है और उसके अनुसार यह ‘अपराध-प्राप्त धन’ का उपयोग है, जो PMLA कानून के तहत दंडनीय है।
इसके साथ ही वाड्रा वर्षों से विवाद में आए गुरुग्राम की जमीन डील—शिकोहपुर गांव की 3.5 एकड़ भूमि—के मामले में भी जांच का सामना कर रहे हैं। ईडी पहले ही इस केस में उनकी कई संपत्तियां जब्त कर चुकी है और यह दावा कर चुकी है कि इस सौदे में प्राप्त करोड़ों रुपये की कमाई की कोई स्पष्ट और वैध व्यावसायिक वजह नहीं थी। अब ताज़ी चार्जशीट में जमीन प्रकरण से आगे बढ़कर ऐसे विदेशी लेनदेन, ईमेल्स और बैंक रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं, जो कथित रूप से वाड्रा की सीधी संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं।
दूसरी तरफ, वाड्रा ने सभी आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि उनके पास लंदन में कोई भी संपत्ति नहीं है—न सीधे और न ही किसी कंपनी के माध्यम से। कांग्रेस नेतृत्व ने भी इसे ‘विच-हंट’ यानी राजनीतिक प्रताड़ना की नई कड़ी बताया है। राहुल गांधी ने तो इसे मोदी सरकार की ‘बदले की राजनीति’ करार देते हुए कहा कि चुनावी मौसम में जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को डराने के लिए किया जा रहा है।
अब पूरा मामला कोर्ट में है, और आने वाली सुनवाइयाँ यह तय करेंगी कि वाड्रा को कितनी राहत या कितनी मुश्किल मिलेगी। यदि ईडी द्वारा आरोपित विदेशी लेनदेन और संपत्ति खरीद के दस्तावेज अदालत में टिक जाते हैं, तो वाड्रा को कानूनन कड़ी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। वहीं राजनीतिक तौर पर यह मामला एक और बड़ा विवाद बनकर उभरा है, जिसके असर आने वाले महीनों में राष्ट्रीय राजनीति पर देखने को मिल सकते हैं।




