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1 अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल अनिवार्य : माइलेज, पर्यावरण और किसानों पर दिखेगा असर?

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 26 फरवरी 2026

देश में स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 1 अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल को अनिवार्य करने का फैसला किया है। E20 पेट्रोल का अर्थ है कि अब पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाएगा, जो गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होने वाला जैव ईंधन है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और कृषि क्षेत्र को नई आर्थिक मजबूती देना है। पेट्रोल पंपों पर चरणबद्ध तरीके से इसकी आपूर्ति पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन अब इसे देशभर में व्यापक रूप से लागू किया जाएगा, जिससे आम आदमी से लेकर उद्योग जगत तक इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।

माइलेज के लिहाज से देखा जाए तो विशेषज्ञों का मानना है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता में हल्की कमी आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। हालांकि नई तकनीक से बने और E20-अनुकूल वाहनों में यह अंतर बहुत ज्यादा महसूस नहीं होगा और सामान्य उपयोग में चालक को कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी। वाहन निर्माताओं ने भी पिछले कुछ समय से अपने इंजन को इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप तैयार करना शुरू कर दिया है, जिससे भविष्य में इस बदलाव का असर और कम दिखाई देगा। वहीं पुराने वाहनों के मालिकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने वाहन की अनुकूलता की जांच करा लें, ताकि लंबे समय में इंजन, पाइप या रबर पार्ट्स पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

पर्यावरण के दृष्टिकोण से E20 पेट्रोल को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इथेनॉल मिश्रण से कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है, जिससे वायु प्रदूषण घटेगा और शहरों में प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं पर कुछ हद तक नियंत्रण मिल सकेगा। इसके अलावा यह पहल भारत को हरित ऊर्जा और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक मानी जा रही है। कच्चे तेल के आयात में कमी आने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी, जो लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

किसानों के लिए यह योजना विशेष रूप से फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि इथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी। गन्ना, मक्का और अन्य अनाज उत्पादक किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने की संभावना है और चीनी मिलों के साथ-साथ डिस्टिलरी उद्योग को भी नया विस्तार मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। सरकार का मानना है कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में निवेश और नवाचार को भी प्रोत्साहित करेगी।

वाहन मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा और क्या गाड़ियां खराब हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि वाहन E20-अनुकूल है तो किसी प्रकार की बड़ी समस्या की आशंका नहीं है और इंजन सामान्य रूप से काम करता रहेगा। नई कारें और दोपहिया वाहन, जो हाल के वर्षों में लॉन्च हुए हैं, उनमें ऐसे मटेरियल और इंजन सेटअप का उपयोग किया जा रहा है जो इथेनॉल मिश्रण को सहन कर सके। हालांकि बहुत पुराने वाहन, खासकर जिनमें रबर पाइप, फ्यूल पंप या इंजन के कुछ हिस्से पुराने डिजाइन के हैं, उनमें लंबे समय तक उपयोग करने पर हल्का घिसाव, स्टार्टिंग समस्या या माइलेज में गिरावट महसूस हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि गाड़ी तुरंत खराब हो जाएगी, लेकिन समय-समय पर सर्विस और जांच जरूरी हो जाएगी।

फायदे और नुकसान की बात करें तो E20 पेट्रोल के कई सकारात्मक पहलू हैं—जैसे प्रदूषण में कमी, आयातित तेल पर निर्भरता कम होना और किसानों की आय बढ़ना। इंजन की सफाई के लिहाज से भी इथेनॉल मिश्रण को बेहतर माना जाता है, जिससे कार्बन जमाव कम हो सकता है। वहीं नुकसान के तौर पर कुछ वाहनों में माइलेज में हल्की गिरावट, पुराने इंजनों में पार्ट्स पर असर और शुरुआती समय में जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

वाहन मालिकों के लिए जरूरी सावधानियों में यह शामिल है कि वे अपनी गाड़ी की कंपनी द्वारा दी गई E20 अनुकूलता की जानकारी जरूर जांचें, समय पर सर्विस कराएं, फ्यूल पाइप और फिल्टर की नियमित जांच करवाएं और यदि गाड़ी बहुत पुरानी है तो अचानक पूरी तरह E20 पर निर्भर होने की बजाय मैकेनिक की सलाह लें। इसके अलावा गाड़ी में किसी असामान्य आवाज, स्टार्टिंग समस्या या माइलेज में अचानक गिरावट दिखाई दे तो तुरंत जांच कराना बेहतर रहेगा।

कुल मिलाकर E20 पेट्रोल से गाड़ियां खराब होने का डर उतना बड़ा नहीं है जितना लोगों के मन में है, खासकर नई तकनीक वाले वाहनों के लिए। थोड़ी जागरूकता, नियमित सर्विस और वाहन की अनुकूलता की जांच के साथ यह बदलाव सामान्य रूप से अपनाया जा सकता है। लंबे समय में इसे स्वच्छ ईंधन, मजबूत कृषि अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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