एबीसी नेशनल न्यूज | लाहौर | 16 फरवरी 2026
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ शरीफ ने एक ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी किया है, जिसने पड़ोसी मुल्क में ही नहीं, भारत में भी चर्चा छेड़ दी है। आदेश साफ है—अब पुलिसकर्मी किसी नागरिक को “ओए”, “क्या रे”, “तू तड़ाक” जैसे शब्दों से संबोधित नहीं कर सकते। उन्हें नागरिकों से बात करते समय “सर”, “जनाब”, “साहब” या “बरखुरदार” जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना होगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी निर्देश में कहा गया है कि पुलिस का व्यवहार शालीन और सम्मानजनक होना चाहिए। कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। इस आदेश का मकसद पुलिस और आम जनता के बीच बेहतर संबंध बनाना बताया गया है।
पाकिस्तान में अक्सर पुलिस के सख्त और रूखे रवैये को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह कदम छवि सुधारने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रशासनिक हलकों का कहना है कि भाषा बदलने से व्यवहार में भी बदलाव आएगा और इससे जनता का भरोसा बढ़ेगा।
इस फैसले की सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है। कई लोगों ने इसे “छोटा लेकिन बड़ा बदलाव” बताया है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि केवल आदेश जारी करना काफी नहीं, इसे जमीन पर लागू कराना असली चुनौती होगी।
दिलचस्प बात यह है कि भारत में भी समय-समय पर पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आम नागरिकों का आरोप रहा है कि पुलिस कई बार व्यक्ति की सामाजिक या आर्थिक स्थिति देखकर संबोधन बदल देती है। ऐसे में पाकिस्तान से आई इस खबर ने यहां भी बहस छेड़ दी है कि क्या नागरिकों से सम्मानजनक भाषा में बात करना एक बुनियादी प्रशासनिक मानक नहीं होना चाहिए?
मरियम नवाज़ के इस फैसले से यह संदेश जरूर गया है कि शासन केवल कानून का डंडा नहीं, बल्कि व्यवहार की मर्यादा से भी चलता है। अब देखना होगा कि यह आदेश कागज से निकलकर व्यवहार में कितना उतर पाता है।





