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स्ट्रांग रूम में लोकतंत्र की चोरी? — CCTV बंद, RJD का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग से सुरक्षा बढ़ाने की मांग

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पटना, 9 नवंबर 2025

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच स्ट्रांग रूम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने चुनाव आयोग से तत्काल सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है, साथ ही दो ऐसे वीडियो जारी किए हैं जिनमें CCTV कैमरे बंद होते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। ये वही कैमरे हैं जिनके ज़रिए स्ट्रांग रूम की निगरानी होती है — यानी जहाँ मतपेटियां और EVM मशीनें सुरक्षित रखी जाती हैं। RJD ने आरोप लगाया है कि यह कोई साधारण “तकनीकी खराबी” नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पारदर्शिता पर हमला है। अगर CCTV कैमरे बंद हैं तो क्या भरोसा किया जाए कि वोट वहीं हैं जहाँ जनता ने डाले थे?

RJD नेताओं ने कहा कि यह वीडियो लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। पार्टी प्रवक्ता मनोज झा ने कहा, “हमने अपने कार्यकर्ताओं से रिपोर्ट मंगाई है और सब जगह एक ही पैटर्न दिख रहा है — जहाँ-जहाँ विपक्ष मज़बूत है, वहाँ CCTV बंद हो रहे हैं। यह कोई संयोग नहीं, यह साजिश है।” RJD ने चुनाव आयोग से पूछा है कि क्या CCTV कैमरे की मॉनिटरिंग चुनाव आयोग के नियंत्रण में है या फिर स्थानीय प्रशासन के हवाले कर दी गई है? अगर कैमरे ही बंद कर दिए जाएं तो जनता कैसे विश्वास करे कि स्ट्रांग रूम में कोई छेड़छाड़ नहीं हो रही?

वीडियो में साफ दिखाई देता है कि स्ट्रांग रूम के बाहर लगे कैमरे अचानक अंधेरे में डूब जाते हैं। कुछ सेकंड बाद पूरा फुटेज ब्लैंक हो जाता है। RJD ने दावा किया है कि यह “ब्लैंक मोमेंट” वही समय है जब कुछ संदिग्ध लोग स्ट्रांग रूम के अंदर-बाहर घूमते देखे गए। पार्टी ने सवाल उठाया — “आख़िर यह बिजली जाने की वजह थी या कैमरों को जानबूझकर बंद किया गया?” RJD का आरोप है कि जिस तरह से CCTV फुटेज गायब किए जा रहे हैं, यह चुनावी प्रक्रिया पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा, “अगर वोटों की सुरक्षा पर भी भरोसा नहीं रहा, तो लोकतंत्र का अर्थ ही समाप्त हो जाएगा।”

चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। केवल इतना कहा गया कि “मामले की जांच कराई जा रही है।” लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह “जांच” सिर्फ़ दिखावा है। RJD नेताओं ने कहा कि “पिछले चुनावों में भी कई बार ऐसी घटनाएं हुई थीं, जहाँ CCTV खराब होने के बहाने EVM की हेराफेरी की गई।” पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर आयोग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो वे राज्यभर में धरना देंगे और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क पर उतरेंगे।

RJD के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा — “CCTV कैमरों का बंद होना कोई तकनीकी गलती नहीं, यह ‘राजनीतिक चाल’ है। बिहार के लोगों ने वोट दिया है, लेकिन अब डर है कि कहीं वही वोट किसी और की झोली में न चला जाए। चुनाव आयोग को जवाब देना होगा कि रात के अंधेरे में लोकतंत्र पर डाका कौन डाल रहा है?”

तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि “स्ट्रांग रूम के चारों ओर पूरी तरह से केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए, ताकि प्रशासनिक दबाव में कोई अधिकारी मशीनों से छेड़छाड़ न कर सके। अगर CCTV बंद रहे तो इसे जनता के साथ धोखा माना जाएगा।”

राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि बिहार में “EVM सुरक्षा” से ज़्यादा “EVM की सुरक्षा की कहानी” बन चुकी है। विपक्षी दलों का कहना है कि जनता ने तो लोकतंत्र पर भरोसा दिखाया, लेकिन अब उस भरोसे की निगरानी के कैमरे ही बंद हो रहे हैं। यह वही बिहार है जहाँ वोट की ताकत ने बार-बार सत्ता बदल दी — और आज वही वोट संदेह के घेरे में हैं।

RJD ने चुनाव आयोग को औपचारिक ज्ञापन सौंपते हुए पांच प्रमुख माँगें रखी हैं —

  1. सभी स्ट्रांग रूम के CCTV कैमरों की 24 घंटे लाइव मॉनिटरिंग सार्वजनिक की जाए।
  1. स्थानीय प्रशासन नहीं, बल्कि केंद्रीय पर्यवेक्षक इन कैमरों की निगरानी करें।
  1. किसी भी कैमरे के बंद होने की स्थिति में तुरंत पंचनामा दर्ज कर विपक्षी उम्मीदवारों को सूचित किया जाए।
  1. स्ट्रांग रूम के पास राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की चौबीसों घंटे मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
  1. CCTV रिकॉर्डिंग को क्लाउड सर्वर पर स्टोर किया जाए ताकि कोई छेड़छाड़ संभव न हो।

RJD ने कहा कि अगर आयोग इन मांगों को नजरअंदाज करता है, तो यह साबित हो जाएगा कि बिहार का चुनाव पहले से तय है, और जनता की आवाज़ को “तकनीकी बहाने” के नाम पर कुचला जा रहा है।

इस घटना ने एक बार फिर से उस पुराने सवाल को जगा दिया है जो हर चुनाव के बाद उठता है — क्या भारत का चुनाव आयोग अब भी निष्पक्ष है? या फिर वह सत्ता की मंशा के आगे झुक चुका है? जब जनता की नज़र के लिए लगाए गए कैमरे ही बंद कर दिए जाएं, तो लोकतंत्र की नीयत पर शक होना स्वाभाविक है।

RJD ने इसे “लोकतंत्र की CCTV चोरी” करार दिया है। पार्टी ने कहा कि “स्ट्रांग रूम की सुरक्षा अगर कैमरे नहीं संभाल सकते, तो फिर कौन करेगा? जनता ने अपनी आवाज़ इन मशीनों में रखी है। अगर उन पर ताला भी राजनीतिक हो गया, तो फिर लोकतंत्र नहीं, तानाशाही बचेगी।”

बिहार की जनता अब सवाल पूछ रही है —”क्या हमारे वोट अब सिर्फ़ बटन दबाने तक सीमित रह गए हैं?” अगर CCTV बंद हैं, तो क्या लोकतंत्र की आँखें भी बंद हो चुकी हैं? और सबसे बड़ा सवाल — क्या चुनाव आयोग सुन रहा है, या फिर चुप्पी की स्ट्रांग रूम में ही बंद हो गया है?

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