एबीसी नेशनल न्यूज | 16 जनवरी 2026
पाकिस्तान ने दावा किया है कि भारत के साथ हालिया सैन्य तनाव और संघर्ष के बाद उसके बनाए गए लड़ाकू विमान JF-17 थंडर की अंतरराष्ट्रीय मांग में तेजी आई है। पाकिस्तानी सरकार और रक्षा प्रतिष्ठान का कहना है कि इस टकराव के दौरान JF-17 के इस्तेमाल ने उसकी क्षमताओं को दुनिया के सामने पेश किया, जिसके बाद कई देशों ने इन फाइटर जेट्स में रुचि दिखाई है। पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम को अपनी वायुसेना और घरेलू रक्षा उद्योग की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है। पाकिस्तान के मुताबिक, इस समय वह कम से कम छह मुस्लिम देशों के साथ JF-17 फाइटर जेट की बिक्री को लेकर बातचीत कर रहा है। इन देशों में बांग्लादेश का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा मध्य-पूर्व और अफ्रीका के कुछ देशों के साथ भी संपर्क होने का दावा किया गया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि अभी बातचीत शुरुआती दौर में है और कीमत, तकनीकी जरूरत, प्रशिक्षण और रखरखाव जैसे मुद्दों पर चर्चा चल रही है, हालांकि किसी भी डील पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है।
सरकार का तर्क है कि JF-17 एक कम लागत वाला, बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जो उन देशों के लिए उपयुक्त है जो महंगे अमेरिकी या यूरोपीय फाइटर जेट नहीं खरीद सकते। पाकिस्तान का कहना है कि हालिया संघर्ष के दौरान इस विमान के इस्तेमाल से उसकी विश्वसनीयता बढ़ी है और इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग सामने आ रही है। इस विमान को पाकिस्तान ने चीन के सहयोग से विकसित किया है और यह पाकिस्तान वायुसेना का प्रमुख फाइटर जेट माना जाता है।
पाकिस्तान इस संभावित निर्यात को अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए भी उम्मीद की तरह देख रहा है। सरकार का मानना है कि अगर JF-17 की बिक्री होती है तो इससे देश को विदेशी मुद्रा मिलेगी, रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और पाकिस्तान हथियार आयातक के साथ-साथ निर्यातक देश के रूप में भी पहचान बना सकेगा। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि फाइटर जेट की बिक्री केवल दावों से नहीं होती, इसके लिए लंबी तकनीकी और कूटनीतिक प्रक्रिया होती है, इसलिए पाकिस्तान के इन दावों पर अंतिम तस्वीर आने में अभी वक्त लगेगा।




