आलोक कुमार । नई दिल्ली 13 दिसंबर 2025
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर खतरनाक स्तर पार कर लिया है। लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता के बीच एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में 450 से ऊपर पहुंच गया, जिसे ‘सीवियर प्लस’ श्रेणी में रखा जाता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-IV तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में अब सबसे सख्त प्रतिबंध लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम जनजीवन, यातायात, निर्माण गतिविधियों, स्कूलों और दफ्तरों पर पड़ रहा है।
GRAP-IV लागू होते ही सबसे पहले निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) से जुड़े सभी काम पूरी तरह रोक दिए गए हैं। इसका उद्देश्य हवा में उड़ने वाली धूल और प्रदूषक कणों को कम करना है। इसके अलावा दिल्ली में गैर-जरूरी ट्रकों और भारी वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल CNG, LNG, इलेक्ट्रिक या BS-VI मानकों वाले वाहन, और आवश्यक सेवाओं से जुड़े ट्रक ही राजधानी में प्रवेश कर सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि सड़कों पर भारी वाहनों की संख्या घटने से प्रदूषण के स्तर को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
GRAP-IV के तहत दफ्तरों और कार्यस्थलों को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सरकारी और निजी कार्यालयों को कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करने की सलाह दी गई है, जबकि शेष कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) की व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी और ट्रैफिक से होने वाला प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी। वहीं, उद्योगों को भी कड़े उत्सर्जन मानकों का पालन करने को कहा गया है, और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
प्रदूषण के इस गंभीर स्तर का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ रहा है। कई राज्यों ने एहतियातन स्कूलों की कक्षाएं हाइब्रिड या ऑनलाइन मोड में संचालित करने का फैसला लिया है, खासकर प्राथमिक कक्षाओं के लिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें, सुबह-शाम की सैर से बचें और यदि बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क का इस्तेमाल करें। अस्पतालों में सांस और एलर्जी से जुड़ी शिकायतों के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर में बीते कुछ दिनों से घना स्मॉग छाया हुआ है, जिससे दृश्यता भी काफी कम हो गई है। सड़कों पर धुंध की मोटी परत और आंखों में जलन, गले में खराश तथा सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम, हवा की कम गति, वाहनों के धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने जैसे कारणों से प्रदूषण लंबे समय तक बना रह सकता है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें, निजी वाहनों के प्रयोग से बचें और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों में सहयोग न करें। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जिनमें यातायात पर अतिरिक्त प्रतिबंध और अन्य आपात उपाय शामिल हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, GRAP-IV का लागू होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह जन-स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में मौसम और प्रशासनिक कदम तय करेंगे कि लोगों को इस जहरीली हवा से कब और कितनी राहत मिल पाएगी।




