नई दिल्ली 11 नवंबर 2025
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद को करारा झटका देते हुए एक कड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि कंपनी तीन दिनों के भीतर सभी ऐसे विज्ञापनों को तुरंत बंद करे जो भ्रामक, झूठे, अतिरंजित दावे करते हैं या उपभोक्ताओं को गुमराह करने की क्षमता रखते हैं। यह मामला तब गंभीर हुआ जब Dabur India ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि पतंजलि आयुर्वेद उनके उत्पादों को नीचा दिखाने, मार्केट में गलत धारणा बनाने और उपभोक्ताओं को “धोखे में डालने” वाली विज्ञापन रणनीति अपना रहा है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी कंपनी को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने प्रोडक्ट को बढ़ावा देने के लिए दूसरे ब्रैंड की छवि खराब करे। जस्टिस के नेतृत्व वाली पीठ ने टिप्पणी की कि बाज़ार में प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक है, लेकिन “अनुचित प्रतिस्पर्धा” और “झूठे दावे” कानूनन अपराध की श्रेणी में आते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े उत्पादों के मामले में कंपनियों की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है।
सुनवाई के दौरान Dabur India के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि पतंजलि लगातार ऐसे विज्ञापन चला रहा है जिनमें दावा किया जाता है कि पतंजलि के उत्पाद “पूरी तरह सुरक्षित, प्राकृतिक और वैज्ञानिक रूप से श्रेष्ठ” हैं, जबकि अन्य कंपनियों के उत्पादों को “हानिकारक केमिकलयुक्त” बताकर बदनाम किया जा रहा है। Dabur ने कोर्ट को वीडियो सबूत भी सौंपे जिनमें पतंजलि के विज्ञापनों में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष तरीके से अन्य लोकप्रिय FMCG ब्रैंड्स को निशाना बनाया गया था।
इसी बीच, अदालत ने पतंजलि के अधिवक्ताओं से साफ पूछा कि क्या कंपनी के पास ऐसे किसी वैज्ञानिक परीक्षण, औषधि प्रमाणन या सरकारी स्वीकृति के ठोस दस्तावेज़ हैं जो उनके विज्ञापन दावों का समर्थन कर सकें। जवाब में पतंजलि की ओर से दिए गए दस्तावेज़ अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए तीन दिनों की सख्त समयसीमा दे दी—इस दौरान कंपनी को सभी भ्रामक और विवादित विज्ञापन बंद करने होंगे।
कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए पतंजलि से विस्तृत जवाब माँगा है और यह भी चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन पाया गया तो कंपनी और उसके प्रमोटर्स पर भारी जुर्माना, दंडात्मक कार्रवाई और अवमानना की कार्यवाही भी की जा सकती है। अदालत ने केंद्र सरकार से भी रिपोर्ट तलब की है कि विज्ञापन नियमों की निगरानी को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं।
इस फैसले ने FMCG सेक्टर में हलचल मचा दी है, क्योंकि पतंजलि के विज्ञापन अक्सर विवादों में रहे हैं—कभी दवाओं के चमत्कारिक दावों को लेकर, तो कभी एलोपैथी और आधुनिक चिकित्सा पद्धति पर टिप्पणी को लेकर। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश न केवल पतंजलि बल्कि पूरे उद्योग जगत में पारदर्शिता और जिम्मेदारी के नए मानक तय करेगा।
फिलहाल, पतंजलि की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कानूनी हलकों में इस आदेश को कंपनी के लिए गंभीर झटका माना जा रहा है। देशभर में उपभोक्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों की नज़र इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी है—जो पतंजलि के विज्ञापनों के भविष्य और बाज़ार की प्रतिस्पर्धा की दिशा दोनों को तय कर सकती है।




