अंतरराष्ट्रीय डेस्क 3 दिसंबर 2025
भारत–रूस ऊर्जा रिश्तों पर क्रेमलिन का बड़ा बयान—रूसी तेल आयात में कमी सिर्फ ‘क्षणिक’
भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में हालिया गिरावट को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मॉस्को ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को भारतीय पत्रकारों से बातचीत में साफ कहा कि “भारत में रूसी तेल आयात में आई गिरावट अस्थायी है और रूस जल्द ही नई दिल्ली को सप्लाई फिर बढ़ाएगा।” पेस्कोव का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिखर वार्ता के लिए भारत आने वाले हैं। इस बयान ने भारत–रूस ऊर्जा रणनीति को लेकर तमाम अटकलों को शांत कर दिया है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने घटाई खरीद—रूसी कंपनियों पर दबाव, रिफाइनरियों ने रोक दी खरीद
पिछले कुछ महीनों में रूस की प्रमुख तेल कंपनियों—रॉसनेफ्ट और लुकोइल—पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भारत की कई रिफाइनरियों जैसे एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और मैंगलोर रिफाइनरी ने रूसी तेल की खरीद रोक दी थी। इसी कारण भारत का रूसी तेल आयात तीन साल के निचले स्तर तक लुढ़क गया। हालांकि, क्रेमलिन का ताजा संदेश यह संकेत देता है कि रूस, भारत के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद कमज़ोर नहीं होने देना चाहता। पेस्कोव ने ज़ोर देकर कहा कि मॉस्को ऐसे वैकल्पिक व्यापार ढांचे बना रहा है जो “किसी तीसरे देश के दबाव से प्रभावित न हों।”
भारत की ऊर्जा रणनीति: इंडियन ऑयल और BPCL फिर से बढ़ाने को तैयार खरीद
गिरावट के बावजूद, भारत ने रूस के साथ ऊर्जा साझेदारी समाप्त नहीं की है। इंडियन ऑयल ने गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से रूसी तेल खरीदने के लिए ऑर्डर दिए हैं, जबकि भारत पेट्रोलियम भी नई डील के अंतिम चरण में है। वहीं, रूस समर्थित नयारा एनर्जी लगातार रूसी तेल प्रोसेस कर रही है। क्रेमलिन के बयान से स्पष्ट हो गया है कि आने वाले हफ्तों में भारत–रूस तेल व्यापार में फिर से तेजी देखी जा सकती है। यह भी संकेत हैं कि भारत प्रतिबंधों के दबाव और अपने ऊर्जा सुरक्षा संतुलन के बीच एक व्यावहारिक रास्ता चुन रहा है, जिसमें रूस महत्वपूर्ण बना रहेगा।
पुतिन की भारत यात्रा की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण संदेश—ऊर्जा साझेदारी बनी रहेगी मजबूत
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा लंबे समय से चर्चा में है। ऐसे में क्रेमलिन का यह बयान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। रूस चाहता है कि भारत—जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है—आगे भी ऊर्जा सहयोग में एक प्रमुख और स्थिर भागीदार बना रहे। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों और पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव के बीच रूस यह संदेश दे रहा है कि “भारत हमारा भरोसेमंद साझेदार है और रहेगा।”
भारत–रूस ऊर्जा साझेदारी अटूट—बाहरी दबाव भी नहीं तोड़ सकता रणनीतिक गठजोड़
गिरावट अस्थायी है या रणनीतिक—इस पर राजनीतिक विश्लेषण जारी है। लेकिन क्रेमलिन के सीधे बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और रूस दोनों ही ऊर्जा सहयोग को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने देना चाहते। भारत की ऊर्जा ज़रूरतें और रूस के लिए भारत एक स्थिर, विशाल बाज़ार—यह दोनों देशों को स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे का करीबी साझेदार बनाते हैं।




