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ज़हरीले पानी से मौतें, सरकार बेखबर: 21 जानें गईं, हज़ारों बीमार—फिर भी BJP की बेशर्मी जारी : कांग्रेस

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परवेज खान | इंदौर 12 जनवरी 2026

‘न्याय मार्च’ से सरकार को जगाने की कोशिश, पीड़ितों की आवाज़ सड़क पर गूंजी

मध्य प्रदेश में आज इंसान की सबसे बुनियादी ज़रूरत—पीने का पानी—ही लोगों की मौत की वजह बन गया है। दूषित और ज़हरीले पानी से 21 लोगों की जान जा चुकी है, हजारों लोग बीमार होकर अस्पतालों में तड़प रहे हैं और घर-घर में मातम पसरा है। लेकिन इस मानवीय त्रासदी पर सत्ता में बैठी BJP सरकार संवेदना और जवाबदेही दिखाने के बजाय बचाव और टालमटोल में जुटी है। कांग्रेस का आरोप है कि जब लोग ज़हर पीने को मजबूर हों और मर रहे हों, तब सरकार का यूँ बेपरवाह रहना सीधे-सीधे जनविरोधी और अमानवीय रवैया है। इसी जनविरोधी मानसिकता और खुले अन्याय के खिलाफ मध्य प्रदेश कांग्रेस सड़कों पर उतरी। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, CLP नेता उमंग सिंघर और कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ‘न्याय मार्च’ निकाला गया। यह मार्च किसी राजनीतिक प्रदर्शन से ज़्यादा, पीड़ित परिवारों की चीख और आंसुओं की आवाज़ रही। कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि यह लड़ाई ज़िंदगी और इंसाफ के लिए है। जब तक हर पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, यह संघर्ष नहीं रुकेगा।

‘स्मार्ट सिटी’ का खोखलापन उजागर, 21 मौतें किसकी जवाबदेही?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इंदौर में जहरीले पानी से 21 लोगों की मौत ने ‘मोदी का स्मार्ट सिटी वाला अर्बन मॉडल’ पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा कि चमक-दमक, फ्लेक्स और प्रचार से शहर स्मार्ट नहीं बनते, साफ पानी और सुरक्षित जीवन से शहर बसते हैं। पटवारी ने ऐलान किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता अब प्रदेश के हर शहर और हर वार्ड में जल ऑडिट करेंगे और मोदी–मोहन सरकार को आईना दिखाएंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि मध्य प्रदेश को अब ऐसे मुख्यमंत्री नहीं चाहिए, जो ज़मीनी हकीकत से कटे हों—राज्य को ज़िंदगी बचाने वाला प्रशासन चाहिए।

माँ अहिल्याबाई के नाम पर संवेदना और आक्रोश

जीतू पटवारी ने भावुक होते हुए माँ अहिल्याबाई को याद किया और कहा कि आज कुछ अहंकारी लोग इंदौर के निर्दोष नागरिकों को भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “माँ अहिल्याबाई, आपके चरणों में शीश नवाकर प्रार्थना है कि इन लोगों को सद्बुद्धि दें और इंदौरवासियों पर अपनी कृपा बनाए रखें।” यह शब्द सिर्फ श्रद्धा नहीं थे, बल्कि सत्ता के अहंकार पर सीधा प्रहार थे।

‘इंदौर सिर्फ घटना नहीं, चेतावनी है’—हरीश चौधरी

प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि भागीरथपुरा में सरकार की लापरवाही से जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक हर पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता। चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि इंदौर कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर आज भी सरकार नहीं चेती, तो कल हालात और भयावह होंगे। उन्होंने दोहराया कि स्वच्छ हवा और स्वच्छ पानी मानव जीवन की बुनियाद हैं, और जो सरकार इसे नहीं समझती, वह शासन का नैतिक अधिकार खो देती है।

देश–राज्य में बिगड़ता पर्यावरण: ज़हरीली हवा, ज़हरीला पानी

यह संकट सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। राजस्थान में 43 प्रतिशत भूजल नमूनों में नाइट्रेट सुरक्षित सीमा से ऊपर पाया गया है और भूजल दोहन 147 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। वहीं जयपुर जैसे शहरों में PM2.5 का स्तर WHO की सुरक्षित सीमा से करीब 10 गुना ज़्यादा है, जो फेफड़ों, दिल और दिमाग पर सीधा हमला करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज़हरीली हवा शरीर को कमज़ोर करती है और ज़हरीला पानी उसे भीतर से खत्म कर देता है। अगर हवा और पानी को सार्वजनिक नीति की सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं बनाया गया, तो आने वाला समय बेहद खतरनाक होगा।

धर्म की राजनीति पर करारा सवाल—उमंग सिंघर

CLP नेता उमंग सिंघर ने भाजपा पर दोहरे मापदंडों का आरोप लगाते हुए तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा—भागीरथपुरा में दूषित पानी से जिन 21 लोगों की जान गई, क्या वे हिंदू नहीं थे? अस्पतालों में गंदा पानी पीकर बीमार पड़े हज़ारों लोग, क्या वे हिंदू नहीं हैं? उन्होंने कहा कि जो भाजपा विदेशों में हिंदुओं की चिंता दिखाती है, वह अपने ही देश और मध्य प्रदेश के हिंदुओं की ज़िंदगी से खिलवाड़ क्यों कर रही है? सिंघर ने इंदौर की जनता से अपील की कि पहले अपने घर के पानी का वॉटर ऑडिट कराएं और जब तक शुद्ध पानी सुनिश्चित न हो, टैक्स देने पर भी सवाल उठाएं। उनका संदेश साफ था—धर्म से पहले जीवन, और जीवन के साथ जवाबदेही।

अब सवाल टालने का वक्त नहीं

कांग्रेस का कहना है कि अब यह समय बयानबाज़ी का नहीं, जवाब देने और कार्रवाई करने का है। 21 मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं—वे टूटे हुए परिवार, उजड़े घर और अधूरी कहानियाँ हैं। अगर सरकार अब भी नहीं जागी, तो जनता उसे जगाने पर मजबूर होगी। न्याय मार्च सिर्फ एक शुरुआत है, क्योंकि जब पानी ज़हर बन जाए, तो खामोशी भी अपराध बन जाती है।

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