एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 9 मार्च 2026
मध्य-पूर्व में अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है, जिससे दुनिया भर में आर्थिक चिंता बढ़ गई है।
ऊर्जा बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार युद्ध के कारण तेल उत्पादन और आपूर्ति पर संभावित असर को लेकर बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों को आशंका है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम हैं। इसी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है। मौजूदा सैन्य तनाव के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही को लेकर जोखिम बढ़ गया है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक तेल की कीमतों में आई यह तेजी केवल युद्ध की खबरों का असर नहीं है, बल्कि संभावित आपूर्ति संकट की आशंका भी इसका बड़ा कारण है। यदि संघर्ष का दायरा बढ़ता है या तेल उत्पादन से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचता है तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है। ऐसे में कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो कई अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
मध्य-पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर अब आने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा और तेल आपूर्ति की स्थिति तय करेगी कि बाजार में स्थिरता लौटती है या कीमतों में और उछाल देखने को मिलता है।




