एबीसी नेशनल न्यूज | इंटरनेशनल डेस्क | 23 फरवरी 2026
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2025 में लगाए गए कई टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद एशियाई देशों के सामने नई व्यापारिक अनिश्चितता खड़ी हो गई है। अदालत के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने आयातित वस्तुओं पर 15% का नया वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा कर दी, जबकि अमेरिकी कस्टम विभाग ने पहले वाले टैरिफ की वसूली फिलहाल रोकने की बात कही है। इस घटनाक्रम ने भारत से लेकर इंडोनेशिया और जापान तक उन देशों को झटका दिया है, जिन्होंने पिछले महीनों में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और निवेश योजनाओं पर अरबों डॉलर की प्रतिबद्धताएं जताई थीं।
विश्लेषकों का मानना है कि पुराने टैरिफ हटने के बावजूद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, क्योंकि नई नीति के तहत अमेरिका अभी भी उच्च आयात शुल्क बनाए रखने के पक्ष में है। विशेषज्ञों के अनुसार हाल में हुए कई व्यापार समझौते पारंपरिक कानूनी संधियों जितने मजबूत नहीं हैं, जिससे भविष्य में नियमों में बदलाव की गुंजाइश बनी रहती है। छोटे और निर्यात-निर्भर एशियाई देशों के लिए यह चुनौती और बड़ी है, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति काफी हद तक अमेरिकी बाजार और वॉशिंगटन के साथ राजनीतिक संबंधों पर निर्भर करती है।
चीन ने इस फैसले और नए टैरिफ के प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन शुरू कर दिया है और एक बार फिर एकतरफा शुल्क वृद्धि का विरोध दोहराते हुए कहा है कि व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि टैरिफ विवाद के बावजूद चीन के साथ उच्च स्तरीय वार्ता और आर्थिक सहयोग जारी रहेगा। जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और सिंगापुर जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों ने भी सतर्क रुख अपनाते हुए स्थिति का अध्ययन करने और नई व्यवस्था के लागू होने के तरीके पर स्पष्टता पाने के लिए वॉशिंगटन से बातचीत की तैयारी जताई है।
एशिया की निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं के लिए 15% का समान वैश्विक टैरिफ विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका में विदेशी उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी और मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों जैसे क्षेत्रों को आंशिक राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन देशों की आपूर्ति श्रृंखला का अंतिम उत्पादन अमेरिका में होता है, उनके लिए प्रभाव का आकलन और जटिल रहेगा, लेकिन समग्र रूप से वैश्विक व्यापार लागत बढ़ने की आशंका तय मानी जा रही है।
ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू किया गया यह नया 15% टैरिफ अस्थायी प्रावधान के तहत करीब पांच महीनों तक प्रभावी रह सकता है, जिसके बाद इसे स्थायी बनाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। इस बीच एशियाई सरकारें अपने निर्यात हितों की रक्षा, निवेश रणनीतियों की समीक्षा और वैकल्पिक बाजारों की तलाश जैसे कदमों पर विचार कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अमेरिका की व्यापार नीति और प्रमुख शक्तियों के बीच वार्ताएं यह तय करेंगी कि एशिया की अर्थव्यवस्थाएं इस नई टैरिफ व्यवस्था के साथ कैसे तालमेल बैठाती हैं।




