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कांग्रेस में होगा बड़ा संगठनात्मक फेरबदल? प्रियंका और सचिन पर खास नजर!!

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एबीसी डेस्क 3 जनवरी 2026

साल 2026 कांग्रेस पार्टी के लिए सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि संगठनात्मक पुनर्निर्माण का साल बनता दिख रहा है। पार्टी के भीतर संकेत मिल रहे हैं कि अप्रैल–मई 2026 के बाद कांग्रेस को नया संगठन महासचिव मिल सकता है, और इसके साथ ही शीर्ष नेतृत्व से लेकर राज्यों तक बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह सब “संगठन सृजन अभियान” के तहत किया जा रहा है, जिसका मकसद जमीनी संगठन को फिर से खड़ा करना और 2029 की लड़ाई से पहले पार्टी को नई धार देना है।

पांच राज्यों के चुनाव और केरल बना केंद्रबिंदु

2026 में कांग्रेस के सामने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं, जिनमें केरल सबसे अहम माना जा रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि केरल में कांग्रेस जीत के काफी करीब खड़ी है। ऐसे में अगर मौजूदा संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल को केरल की जिम्मेदारी देकर राज्य में शिफ्ट किया जाता है, तो स्वाभाविक तौर पर केंद्र में संगठन महासचिव की कुर्सी खाली होगी, और यहीं से नए चेहरे की एंट्री की संभावनाएं तेज हो जाती हैं।

प्रियंका गांधी को बड़ी जिम्मेदारी? हिंदी बेल्ट पर फोकस

कांग्रेस के अंदरखाने यह चर्चा भी तेज है कि प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी का नया कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है। तर्क साफ है—हिंदी बेल्ट के राज्यों को समझने, वहां संगठन को धार देने और बीजेपी के आक्रामक नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए प्रियंका का केंद्र में सक्रिय रोल बेहद जरूरी माना जा रहा है। उनके मैदान में उतरने से उत्तर भारत में कांग्रेस को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सचिन पायलट: राजस्थान से संगठन तक संभावनाएं

वहीं सचिन पायलट को लेकर भी रणनीतिक मंथन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर 2028 विधानसभा चुनाव के लिए पूरी छूट (फ्री हैंड) दी जा सकती है, ठीक उसी तरह जैसे असम में गौरव गोगोई को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर चुनावी रणनीति की कमान सौंपी गई। राजस्थान कांग्रेस को युवा नेतृत्व और स्पष्ट दिशा देने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।

अगर प्रियंका अध्यक्ष बनीं, तो सचिन संगठन महासचिव?

कांग्रेस के अंदर एक और दिलचस्प संभावना पर चर्चा है—अगर प्रियंका गांधी को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है, तो सचिन पायलट को संगठन महासचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। इससे पार्टी को युवा चेहरा, प्रशासनिक अनुभव और चुनावी रणनीति—तीनों का संतुलन मिल सकता है। यह बदलाव कांग्रेस को पुराने ढांचे से निकालकर एक ज्यादा आक्रामक और समन्वित संगठन की ओर ले जा सकता है।

कुल मिलाकर, 2026 कांग्रेस के लिए सिर्फ चुनावों का साल नहीं, बल्कि नेतृत्व और संगठन के नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें अप्रैल–मई के बाद होने वाले फैसलों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि कांग्रेस भविष्य की राजनीति के लिए किस दिशा में कदम बढ़ाती है।

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