राष्ट्रीय / राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/गुवाहाटी | 7 अप्रैल 2026
कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी जंग अब और भी तीखी हो गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लेकर की गई बेहद अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी ने पूरे विपक्ष को भड़का दिया है। कांग्रेस अब इसे सिर्फ एक नेता का अपमान नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज पर सीधा हमला मान रही है और हिमंता सरमा से बिना शर्त माफी की मांग तेज हो गई है।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस घटना की सबसे कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि खरगे जी जैसे सम्मानित दलित नेता के खिलाफ इस तरह की गंदी भाषा का इस्तेमाल बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी सिर्फ खरगे जी को नहीं, बल्कि देश के करोड़ों दलितों और SC-ST समाज को जानबूझकर अपमानित करने की साजिश है। उन्होंने इसे बीजेपी की हताशा और RSS की मानसिकता का सबूत बताया और साफ चेतावनी दी कि कांग्रेस इस मुद्दे को अब सड़क से लेकर संसद तक ले जाएगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खुद इस विवाद पर आगबबूला नजर आए। उन्होंने कहा कि हिमंता सरमा जैसे लोग गालियां देकर विपक्ष को कुचलना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस किसी भी दबाव या धमकी से नहीं डरने वाली। खरगे ने पवन खेड़ा के साथ पूरी मजबूती से खड़े होने की बात दोहराई और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर हिमंता सरमा माफी नहीं मांगते तो कांग्रेस पूरे देश में बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ देगी।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनाते ने हिमंता सरमा की भाषा को बेहद घटिया, अभद्र और मर्यादा के बिल्कुल बाहर बताया। उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री का यह बयान उनकी बौखलाहट और घबराहट को साफ दिखाता है। पार्टी के दूसरे प्रवक्ता आलोक शर्मा ने भी हमला बोलते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति इस स्तर की भाषा का इस्तेमाल करे, यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने पवन खेड़ा के सवालों का जवाब तथ्यों से देने की बजाय धमकी देने की निंदा की।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस मुद्दे पर तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि खरगे जैसे बड़े दलित नेता का अपमान पूरे दलित समुदाय का अपमान है। सिद्धारमैया ने हिमंता सरमा से तुरंत माफी मांगने की मांग की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम इस तरह के अपमान को चुपचाप देख रहे हैं, जो उनकी सोच को उजागर करता है।
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक माहौल को बुरी तरह गरमा दिया है। कांग्रेस इसे दलित सम्मान और लोकतांत्रिक मर्यादा का बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जा रही है, जबकि बीजेपी की तरफ से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अब संसद के साथ-साथ देश भर में इस मुद्दे पर प्रदर्शन करने की तैयारी में है।
यह विवाद अब केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा। यह दलित सम्मान, राजनीतिक मर्यादा और सत्ता की मनमानी के खिलाफ सीधी लड़ाई बन चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भड़क सकता है, खासकर जब देश चुनावी रणभूमि की ओर बढ़ रहा है। कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि अब वह चुप रहने वाली नहीं है।




