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24 अकबर रोड से कांग्रेस को निकालने की तैयारी, यूथ कांग्रेस से भी छीना जाएगा ऑफिस, कांग्रेस ने बताया नोटिस अवैध, अदालत जाएगी पार्टी

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 मार्च 2026

नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्र सरकार के एस्टेट विभाग की ओर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को उसके ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आई। नोटिस में पार्टी को 28 मार्च 2026 तक परिसर खाली करने को कहा गया है, साथ ही 5 रायसीना रोड स्थित भारतीय युवक कांग्रेस कार्यालय को भी इसी समयसीमा के भीतर खाली करने का निर्देश दिया गया है। इस घटनाक्रम ने तुरंत ही सियासी विवाद का रूप ले लिया, जहां कांग्रेस ने इसे “शर्मनाक” और “बदले की भावना से उठाया गया कदम” करार दिया है।

करीब 48 वर्षों से 24 अकबर रोड कांग्रेस का केंद्रीय ठिकाना रहा है और पार्टी के कई बड़े राजनीतिक फैसलों, बैठकों और आंदोलनों का गवाह रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह इमारत केवल एक कार्यालय नहीं, बल्कि पार्टी की ऐतिहासिक विरासत और भावनात्मक पहचान का प्रतीक है। उनका तर्क है कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के राजनीतिक इतिहास तक, इस पार्टी की भूमिका को देखते हुए इस तरह का व्यवहार न सिर्फ अनुचित है बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं के भी खिलाफ है।

कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता और वकील Abhishek Manu Singhvi ने इस नोटिस को “अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए कहा कि पार्टी इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। उनके मुताबिक, नियमों का चयनात्मक इस्तेमाल किया जा रहा है और केवल कांग्रेस को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं सांसद Karti Chidambaram ने भी सवाल उठाया कि अगर नियम हैं तो उन्हें सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, न कि केवल विपक्षी दलों पर।

कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि पार्टी पहले ही 9ए, कोटला मार्ग स्थित इंदिरा गांधी भवन में अपना नया मुख्यालय बना चुकी है, लेकिन 24 अकबर रोड को बनाए रखना ऐतिहासिक और भावनात्मक कारणों से जरूरी था। उनका आरोप है कि सरकार इस कदम के जरिए न सिर्फ एक राजनीतिक दल को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, बल्कि विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास भी कर रही है।

दूसरी ओर, सरकार की तरफ से इस कार्रवाई को नियमों के तहत लिया गया प्रशासनिक निर्णय बताया जा रहा है। हालांकि इस पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकारी संपत्तियों के उपयोग और आवंटन से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

यह पूरा मामला अब केवल एक इमारत या नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोकतंत्र, राजनीतिक समानता और सत्ता के इस्तेमाल को लेकर एक बड़े विवाद में बदलता दिख रहा है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को अदालत से लेकर जनता के बीच तक उठाएगी और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई के रूप में पेश करेगी।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या अदालत इस मामले में दखल देती है या फिर सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव और तेज होता है। फिलहाल, 24 अकबर रोड सिर्फ एक पता नहीं, बल्कि देश की राजनीति का नया रणक्षेत्र बन चुका है।

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