एबीसी डेस्क 17 दिसंबर 2025
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के जर्मनी दौरे को लेकर उठ रही राजनीतिक टिप्पणियों के बीच कांग्रेस ने मजबूती से अपना पक्ष रखा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विदेश मामलों के विभाग के चेयरमैन और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राहुल गांधी की वैश्विक प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय पहुंच अपने आप में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, न कि सवाल खड़े करने का विषय।
सलमान खुर्शीद ने कहा कि आमतौर पर किसी देश के प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय पहुंच होना स्वाभाविक माना जाता है, लेकिन यदि कोई नेता प्रधानमंत्री न होते हुए भी, केवल विपक्ष का नेता होने के बावजूद दुनिया भर में इतनी स्वीकार्यता और मांग रखता है, तो यह असाधारण बात है। उन्होंने कहा कि भारत को इसे संदेह की नजर से देखने के बजाय अपने हित में एक अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संसद जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी अहम है—चाहे वह प्रधानमंत्री के लिए हो या विपक्ष के नेता के लिए। सलमान खुर्शीद ने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम ऐसे होते हैं, जिन्हें आखिरी समय में बदला नहीं जा सकता। ऐसे में इन यात्राओं को लेकर सवाल उठाना अनावश्यक, असंवेदनशील और तर्कहीन है, खासकर तब जब निर्णय गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया हो।
कांग्रेस नेता ने बताया कि राहुल गांधी प्रोग्रेसिव अलायंस (Progressive Alliance) के निमंत्रण पर जर्मनी गए हैं, जो दुनिया भर की 117 प्रगतिशील राजनीतिक पार्टियों का एक अहम वैश्विक मंच है, जिनमें से करीब 30 पार्टियां सत्ता में हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस संगठन के प्रेसिडियम में भी आमंत्रित किया गया है, जो उनके अंतरराष्ट्रीय कद को दर्शाता है।
सलमान खुर्शीद ने भरोसा जताया कि जैसे भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राहुल गांधी का योगदान सराहा गया, उसी तरह जर्मनी में भी उनकी भागीदारी प्रभावशाली और सार्थक होगी। उन्होंने कहा कि आज दुनिया एक अनिश्चित दौर से गुजर रही है, जहां नया विश्व व्यवस्था (New World Order) आकार ले रही है और ऐसे समय में भारत की भूमिका बेहद अहम है।
उन्होंने यूरोप के साथ भारत के संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि यह रिश्ता सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, निवेश और अत्याधुनिक तकनीक से भी जुड़ा है। ऐसे में राहुल गांधी का यूरोप दौरा न सिर्फ राजनीतिक संवाद, बल्कि औद्योगिक नेतृत्व और निवेशकों से संवाद का भी अवसर बनेगा।
सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत को आज दुनिया भर से, खासकर यूरोप से, अधिक निवेश और साझेदारी की जरूरत है। उनके मुताबिक, राहुल गांधी की यह यात्रा भारत के लिए ऐसे ही अवसरों के द्वार खोल सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि राहुल गांधी जो अनुभव, संपर्क और संवाद लेकर लौटेंगे, वह भारत के भविष्य के लिए अनदेखा नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, कांग्रेस का संदेश साफ है—राहुल गांधी का जर्मनी दौरा व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारत के वैश्विक हितों से जुड़ा हुआ है, और इस पर सवाल उठाने के बजाय इसे देश के लिए एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जाना चाहिए।




