नई दिल्ली 26 अक्टूबर 2025
देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के अडानी समूह में ₹33,000 करोड़ के निवेश को लेकर कांग्रेस ने बड़ा हमला बोला है। पार्टी ने इस पूरे मामले की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) से जांच कराने की मांग की है, यह कहते हुए कि आम निवेशकों और पॉलिसीधारकों के पैसों का इस्तेमाल “कॉर्पोरेट हितों को बचाने” के लिए किया जा रहा है।
कांग्रेस का आरोप — सरकार कर रही है अडानी को ‘सरकारी सुरक्षा’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस निवेश को “वित्तीय पारदर्शिता पर हमला” बताया। उन्होंने कहा, “LIC भारत के करोड़ों नागरिकों की बचत का प्रतीक है। लेकिन मोदी सरकार ने इसे एक कॉर्पोरेट कवच बना दिया है ताकि अडानी समूह जैसे करीबी उद्योगपतियों को बचाया जा सके। ₹33,000 करोड़ का निवेश एक गंभीर मामला है और इसे संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी द्वारा जांचा जाना चाहिए।”
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब अडानी समूह के शेयर मूल्य में भारी गिरावट आई थी और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने उसके वित्तीय लेनदेन पर संदेह जताया था, तब भी LIC ने इस समूह में इतना बड़ा निवेश क्यों किया? क्या यह निर्णय स्वतंत्र वित्तीय विवेक से लिया गया या किसी “ऊपरी दबाव” में?
विपक्ष का कहना — ‘जनता के पैसे का निजी इस्तेमाल’
विपक्षी दलों का कहना है कि LIC में आम जनता के करोड़ों निवेशकों का पैसा लगा हुआ है, जिसे किसी एक उद्योग समूह को बचाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “सरकार ने LIC को अडानी समूह के शेयरों में झोंककर देश के नागरिकों की बचत को खतरे में डाल दिया है। अगर यह सब पारदर्शी है तो सरकार को जांच से डर क्यों?”
LIC और सरकार का पक्ष
वहीं, LIC ने बयान जारी कर कहा कि उसका अडानी समूह में निवेश “नियमों और वित्तीय विवेक” के अनुसार किया गया है। निगम ने कहा कि यह निवेश दीर्घकालिक दृष्टि से किया गया है और कंपनी के पोर्टफोलियो में विविधता सुनिश्चित करता है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि “कांग्रेस बिना सबूत के आरोप लगा रही है” और LIC की सभी निवेश प्रक्रियाएं पारदर्शी और नियंत्रित हैं।
पृष्ठभूमि — हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद उठे सवाल
2023 में अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आई थी, जिससे समूह के बाजार पूंजीकरण में हजारों करोड़ का नुकसान हुआ। उस समय LIC का अडानी समूह में बड़ा निवेश होने के कारण आम निवेशकों में चिंता बढ़ी थी।
अब PAC जांच पर टिकी निगाहें
कांग्रेस ने कहा है कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे PAC जांच के लिए तुरंत सहमति देनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ LIC का मामला नहीं, बल्कि “जनता के भरोसे और धन की सुरक्षा” से जुड़ा प्रश्न है।
अब सबकी निगाहें संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी पर टिकी हैं — क्या यह मामला संसद के पटल पर आएगा या फिर एक और बड़ा वित्तीय विवाद धीरे-धीरे दबा दिया जाएगा?




