एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 01 मार्च 2026
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Hosseini Khamenei की कथित लक्षित हत्या की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संप्रभु राष्ट्रों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge की ओर से जारी विस्तृत बयान में कहा गया है कि बिना औपचारिक युद्ध की घोषणा के किसी संप्रभु देश के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देता है, बल्कि यह वैश्विक शांति और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के लिए भी गंभीर चुनौती है। पार्टी ने सर्वोच्च नेता के परिवार, ईरान की जनता और विश्वभर के शिया समुदाय के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुखद घड़ी में भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी उनके साथ एकजुटता से खड़ी है और संयम, संवाद तथा शांति की अपील करती है।
कांग्रेस ने अपने बयान में भारत की विदेश नीति की मूल भावना का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय कूटनीतिक परंपरा संवाद, मध्यस्थता और शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित रही है। पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान, संप्रभु समानता और गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों को अपनी विदेश नीति की आधारशिला मानता है। बयान में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव “वसुधैव कुटुंबकम” की उस प्राचीन भारतीय अवधारणा के विपरीत है, जो पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की शिक्षा देती है। कांग्रेस ने महात्मा गांधी की अहिंसा की विचारधारा और पंडित जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ऐतिहासिक भूमिका हमेशा शांति स्थापित करने और संघर्षों को कम करने की रही है, न कि किसी भी प्रकार के एकतरफा सैन्य हस्तक्षेप का समर्थन करने की।
पार्टी ने United Nations चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और 2(7) का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल का प्रयोग स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है, और किसी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि किसी वर्तमान राष्ट्राध्यक्ष या सर्वोच्च नेता की लक्षित हत्या अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के मूल ढांचे को कमजोर करती है और इससे शासन-परिवर्तन की खतरनाक प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है। बयान में दो टूक शब्दों में कहा गया कि संप्रभुता सशर्त नहीं हो सकती और राजनीतिक वैधता किसी बाहरी शक्ति द्वारा थोपे गए बल से स्थापित नहीं की जा सकती।
अंत में कांग्रेस ने कहा कि हर राष्ट्र के नागरिकों का अविभाज्य अधिकार है कि वे अपने राजनीतिक भविष्य और शासन व्यवस्था का निर्णय स्वयं करें। किसी भी बाहरी शक्ति द्वारा शासन-परिवर्तन की कोशिशें साम्राज्यवादी सोच की पुनरावृत्ति जैसी प्रतीत होती हैं और यह एक न्यायपूर्ण, संतुलित तथा नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के सिद्धांतों के विरुद्ध है। पार्टी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे संयम बरतें, सैन्य कार्रवाई से परहेज करें और संवाद की राह पर लौटें ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।




