मुंबई 17 सितम्बर 2025
दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से जुड़े उन दिनों की बातें आज भी दिलों में खास जगह रखती हैं — जब शाहरुख खान सिर्फ बॉलीवुड के चहेते सितारे नहीं थे, बल्कि एक ऐसा नाम थे जो पढ़ाई, मनोरंजन और खेल-ओ-खेल हर क्षेत्र में टॉप पर रहते थे। निदेशक अनुराग कश्यप, जो शाहरुख खान से जूनियर थे, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में ये सारी खास यादें साझा की हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे ‘किंग खान’ बनने से बहुत पहले SRK की प्रतिभा खिल रही थी।
कश्यप ने बताया कि शाहरुख सिर्फ एक सामान्य छात्र नहीं थे। “वह हॉकी टीम के कप्तान थे, बास्केटबॉल टीम के भी कप्तान, स्पोर्ट्समैन ऑफ द ईयर का खिताब उनके नाम था। और हां — इकॉनॉमिक्स में उन्हें टॉपर भी कहा जाता था।” ये बातें बनाती हैं ये साफ कि उनकी काबिलियत सिर्फ अभिनय भर तक सीमित नहीं थी।
सिर्फ ये ही नहीं, बल्कि अनुराग ने ये भी बताया कि जब शाहरुख का ‘Deewana’ फिल्म रिलीज हुआ था—उनके कॉलेज ने पूरे थियेटर को बुक कर लिया था, और फिल्म की एंट्री सीन पर जब संगीत चलना चाहिए था, लोगों की चिल्लाहट इतनी ज़ोर से थी कि गाना सुनाई ही नहीं दिया। कॉलेज के जिस गर्व और उत्साह ने उस दिन थिएटर को झकझोर दिया, वह दिखाता है कि शाहरुख सिर्फ अपने दोस्तों के बीच प्रसिद्धि नहीं पा रहे थे, बल्कि लोगों की उम्मीदों और कोशिशों का केंद्र बन गए थे।
अन्य साथी-छात्रों की यादों ने इस चित्र को और रंगीन किया है। स्ट कोलंबा स्कूल के साथी, जैसे कि पलाश सेन और राहुल देव जैसी हस्तियों ने बताई है कि स्कूल के दिनों में शाहरुख को हर तरह की गतिविधियों में हिस्सा लेने से कोई नहीं रोकता था — खेल, मंच, बहस-विवाद और स्कूल-कॉलेज के कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागेदारी थी।
इन चर्चाओं से ये साफ हो जाता है कि शाहरुख खान की सफलता सिर्फ किस्मत या समय की देन नहीं थी — बल्कि मेहनत, विविधताओं में महारत और युवा-जीवन में जुटी प्रतिभा का परिणाम थी। कॉलेज के दिनों में उनकी ये विशेषताएँ मिलती थीं: खेलों में नेतृत्व, पढ़ाई में टॉप, और व्यक्तित्व में वह चमक कि जिसे देखते ही लोग उनसे प्रभावित होते।




