राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 मार्च 2026
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन Pawan Khera ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri द्वारा एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती का जो दावा किया गया है, उसका सीधा फायदा आम जनता को नहीं मिलने वाला है। खेड़ा के मुताबिक यह राहत केवल ऑयल मार्केटिंग कंपनियों तक सीमित है और उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल उसी कीमत पर खरीदना पड़ेगा, जिस पर वे पहले से खरीद रहे हैं।
पवन खेड़ा ने अपने बयान में कहा कि सरकार की नीतियों और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि एक्साइज ड्यूटी में वास्तविक राहत दी जाती, तो इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दिखाई देता। लेकिन मौजूदा हालात में जनता के लिए कोई बदलाव नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार का कदम केवल कंपनियों को राहत देने तक सीमित है।
उन्होंने कीमतों की तुलना करते हुए कहा कि मई 2014 में जब Manmohan Singh के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता से बाहर हुई थी, उस समय कच्चे तेल की कीमत लगभग 106.94 डॉलर प्रति बैरल थी और देश में पेट्रोल करीब 71 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल करीब 56 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था। इसके विपरीत, हाल के समय में जब कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही, तब भी आम जनता को पेट्रोल के लिए करीब 95 रुपये प्रति लीटर चुकाने पड़े।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि यदि कीमतों का सही अनुपात देखा जाए तो आज पेट्रोल की कीमत करीब 60 रुपये प्रति लीटर होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार की नीतियों के कारण उपभोक्ताओं को कहीं ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने 12 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई, जिसके कारण ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई और आम आदमी पर बोझ बढ़ता गया।
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि सरकार ने इस अवधि में ईंधन के जरिए भारी राजस्व अर्जित किया है, जो औसतन प्रतिदिन करीब 982 करोड़ रुपये बैठता है। उनके अनुसार, सरकार इस कमाई को जनता के हित में राहत देने के बजाय अपनी नीतियों को सही ठहराने में इस्तेमाल कर रही है।
अपने बयान के अंत में पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार की ऊर्जा नीति को “खोखली” करार देते हुए कहा कि सरकार जनता से ही पैसा लेकर उसे राहत के नाम पर प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति आम उपभोक्ताओं के हितों के विपरीत है और इससे महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।




