अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/वॉशिंगटन | 2 अप्रैल 2026
मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच China ने बड़ा बयान देते हुए तुरंत युद्धविराम की मांग की है। यह अपील ऐसे समय आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर आने वाले हफ्तों में भारी सैन्य हमले जारी रखने की चेतावनी दी है। चीन के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि “सैन्य समाधान किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं हो सकता” और सभी पक्षों से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की। इसके साथ ही चीन ने एक और अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि Strait of Hormuz में पैदा हुआ मौजूदा संकट दरअसल ईरान में चल रही “अवैध सैन्य कार्रवाई” का सीधा परिणाम है, जिसने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। हालात उस समय और ज्यादा बिगड़ गए जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन हफ्तों तक हमले जारी रह सकते हैं और अमेरिकी सेना अपने “लक्ष्यों के करीब” पहुंच चुकी है। इस बयान के बाद न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी घबराहट देखने को मिली है—तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गईं और निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है।
चीन ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि संघर्ष का विस्तार किसी के हित में नहीं है और यह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। चीन पहले भी कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है और हाल ही में पाकिस्तान के साथ मिलकर एक शांति योजना भी सामने रखी थी, जिसमें तत्काल युद्धविराम, संवाद और रणनीतिक मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया गया था। अब होर्मुज को लेकर उसका यह ताजा बयान इस बात का संकेत है कि बीजिंग इस संकट को केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा खतरा मान रहा है।
मिडिल ईस्ट में मौजूदा संघर्ष की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। United States और Iran के बीच टकराव फरवरी 2026 में बड़े सैन्य हमलों के बाद और तेज हो गया, जिसमें दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद से ही क्षेत्र में लगातार जवाबी हमले, सैन्य तैनाती और रणनीतिक जलमार्गों—खासतौर पर होर्मुज—को लेकर तनाव बना हुआ है। चीन का यह कहना कि “अवैध सैन्य कार्रवाई” ही इस संकट की जड़ है, सीधे तौर पर अमेरिका की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहस को और तीखा बना देता है।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल होती हैं तो युद्धविराम पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए अमेरिका की शर्तें पूरी होनी जरूरी होंगी। दूसरी तरफ, ईरान ने कई बार अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वह दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेगा। ऐसे में चीन की अपील और उसका ताजा आरोप इस पूरे विवाद को और जटिल बना देता है, जहां कूटनीति और टकराव दोनों समानांतर चल रहे हैं।
मिडिल ईस्ट बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है—एक तरफ अमेरिका का आक्रामक रुख, दूसरी तरफ ईरान की जवाबी तैयारी, और बीच में चीन जैसी वैश्विक ताकतों की शांति की अपील। लेकिन अब जब होर्मुज संकट की जड़ को लेकर सीधे-सीधे आरोप सामने आ रहे हैं, तो आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि दुनिया युद्ध की ओर बढ़ेगी या आखिरी वक्त पर कूटनीति हालात संभाल लेगी।




