काठमांडू, 12 सितंबर 2025
नेपाल में गहराते राजनीतिक संकट और युवाओं के जेड आंदोलन (Gen-Z Protest) के दबाव के बीच ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। नेपाल की पहली महिला सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस रह चुकीं सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद भंग करते हुए उनके नाम पर मुहर लगाई।
ओली के इस्तीफे और जैन जेड आंदोलन की पृष्ठभूमि
9 सितंबर को प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने पद से इस्तीफा दे दिया था। यह इस्तीफा उस समय आया जब सोशल मीडिया प्रतिबंध, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी को लेकर देशभर में जेन जेड आंदोलन तेज़ हो गया। राजधानी काठमांडू और अन्य शहरों में भड़की हिंसा में 51 लोगों की मौत और 1,300 से अधिक घायल हुए। इन घटनाओं के बाद सेना, राष्ट्रपति और नागरिक समूहों के बीच लगातार वार्ता हुई और अंततः सुशीला कार्की को संकटमोचक के रूप में चुना गया।
शपथ और नई सरकार की जिम्मेदारियाँ
सुशीला कार्की आज रात 8:45 बजे (स्थानीय समय) राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगी। उनकी सरकार का कार्यकाल अस्थायी होगा, जिसका लक्ष्य देश में स्थिरता बहाल करना, सुधारों को आगे बढ़ाना और जल्द चुनाव की तैयारी करना है।
कार्की ने साफ कहा है कि यदि उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने की छूट नहीं मिली, तो वह यह भूमिका स्वीकार नहीं करेंगी। यह बयान उनके सख्त और पारदर्शी रवैये को दर्शाता है।
कौन हैं सुशीला कार्की?
- उम्र: 73 वर्ष।
- शिक्षा: राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (भारत)
- करियर: 2016-17 में नेपाल की पहली महिला सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस
- छवि: भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त और न्यायपालिका में ईमानदारी की मिसाल
आने वाली चुनौतियाँ
कार्की के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश को राजनीतिक अस्थिरता से बाहर निकालने की है। उन्हें जेन जेड आंदोलन के युवाओं की अपेक्षाओं को पूरा करना होगा और साथ ही देश की नाज़ुक आर्थिक हालत सुधारने के लिए त्वरित कदम उठाने होंगे। यह कदम नेपाल के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार किसी पूर्व महिला चीफ जस्टिस को अंतरिम प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।




