एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026
32 करोड़ पन्ने स्कैन होंगे, 17 फरवरी से 10 अप्रैल तक परीक्षाएं
Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा की मूल्यांकन प्रणाली में बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। इस साल लगभग एक करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं की जांच डिजिटल माध्यम से की जाएगी। इसके तहत करीब 32 करोड़ पन्नों को पहले स्कैन किया जाएगा और फिर उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर परीक्षकों को डिजिटल मूल्यांकन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। बोर्ड का कहना है कि इस नई व्यवस्था से जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक बनेगी।
17 फरवरी से 10 अप्रैल तक होंगी परीक्षाएं
सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल तक आयोजित की जाएंगी। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को निर्धारित संग्रह केंद्रों पर भेजा जाएगा, जहां उनकी हाई-रेजोल्यूशन स्कैनिंग की जाएगी। स्कैन की गई कॉपियों को सुरक्षित डिजिटल सर्वर पर अपलोड किया जाएगा और परीक्षक अपने लॉगिन के जरिए ऑनलाइन मूल्यांकन करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी डिजिटल सिस्टम के माध्यम से की जाएगी।
पारंपरिक व्यवस्था से डिजिटल की ओर बदलाव
बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक, पहले कॉपियों को एक शहर से दूसरे शहर भेजने में काफी समय और संसाधन खर्च होते थे। कई बार कॉपियों के देर से पहुंचने या गुम होने जैसी शिकायतें भी सामने आती थीं। डिजिटल मूल्यांकन से इन समस्याओं में कमी आएगी। साथ ही, मॉडरेशन, अंक प्रविष्टि और निगरानी की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हो सकेगी।
रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित, पुनर्मूल्यांकन आसान
डिजिटल सिस्टम के जरिए सभी उत्तर पुस्तिकाओं का स्थायी रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। अगर किसी छात्र को पुनर्मूल्यांकन या जांच की आवश्यकता होती है, तो डिजिटल कॉपी उपलब्ध होने से प्रक्रिया सरल और तेज हो जाएगी। इससे छात्रों की शिकायतों के निस्तारण में भी पारदर्शिता आएगी।
रिजल्ट घोषित करने में तेजी की उम्मीद
बोर्ड का मानना है कि बड़े पैमाने पर स्कैनिंग और ऑनलाइन जांच से परिणाम तैयार करने में लगने वाला समय कम होगा। तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेष सर्वर और संसाधनों की व्यवस्था की गई है, ताकि मूल्यांकन के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए। इससे परिणाम समयबद्ध तरीके से जारी किए जा सकेंगे।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
छात्रों के लिए परीक्षा का प्रारूप पहले जैसा ही रहेगा। प्रश्नपत्र, परीक्षा केंद्र और परीक्षा पद्धति में कोई बदलाव नहीं है। परिवर्तन केवल कॉपियों की जांच प्रक्रिया में है। बोर्ड का कहना है कि यह पहल छात्रों को निष्पक्ष, सटीक और समय पर परिणाम उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।
स्कैनिंग में सावधानी बेहद जरूरी
हालांकि इस पूरी डिजिटल प्रक्रिया की सफलता काफी हद तक स्कैनिंग की सटीकता पर निर्भर करेगी। प्रत्येक उत्तर पुस्तिका के हर पन्ने को ध्यानपूर्वक स्कैन कर उसकी अलग और पूरी फाइल तैयार करना अनिवार्य होगा। यदि किसी कॉपी का एक भी पन्ना गलती से स्कैन होने से छूट गया या डिजिटल फाइल अधूरी रह गई, तो मूल्यांकन के दौरान संबंधित उत्तर दिखाई नहीं देगा और इसका सीधा असर छात्र के अंकों पर पड़ सकता है। ऐसे में बोर्ड और स्कैनिंग एजेंसियों के लिए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा कि किसी भी छात्र की मेहनत तकनीकी चूक की भेंट न चढ़े।
सीबीएसई का यह कदम देश में बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन तंत्र को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




