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रात भी अब महिलाओं की: दिल्ली का ऐतिहासिक कदम और बदलती सामाजिक चेतना का घोषणापत्र

निपुणिका शाहिद, असिस्टेंट प्रोफेसर मीडिया स्ट्डीज, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, दिल्ली NCR नई दिल्ली 30 जुलाई 2025 दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा लिया गया यह निर्णय कि अब महिलाएं रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में काम कर सकेंगी, केवल एक कानूनी संशोधन नहीं बल्कि सामाजिक सोच

डिजिटल युग में प्रेम, वासना और वर्चुअल अंतरंगता: जब स्पर्श की जगह आवाज़ लेती है

21वीं सदी का प्रेम अब सिर्फ गुलाब, पार्क और हाथों में हाथ नहीं रहा। अब वो स्मार्टफोन की स्क्रीन, वीडियो कॉल्स, और पर्सनल चैट्स में सिमटने लगा है। इंटरनेट की पहुंच ने जहां लोगों को जोड़ना आसान बना दिया, वहीं अब Sexual Intimacy और Emotional Bonding भी वर्चुअल होती जा रही है। जब लोग अलग-अलग

जब दूरी भी नज़दीकी बन जाए: डिजिटल प्रेम, फिजिकल चाह और यौन भावनाओं की नई परिभाषा

प्यार अब सिर्फ नज़रों से नहीं, स्क्रीन के ज़रिए भी गहराई तक उतरता है:  21वीं सदी में रिश्तों की परिभाषा बदल चुकी है। अब प्यार का इज़हार सिर्फ आंखों में आंखें डालकर नहीं होता, बल्कि फोन की स्क्रीन पर उंगलियों से टाइप किए गए शब्द, वीडियो कॉल पर मुस्कान, और रात की बातचीत में दिल

डार्क चॉकलेट और सेक्स: स्वाद, सेहत और संवेदना का मोहक संगम

डार्क चॉकलेट — सिर्फ एक मिठास नहीं, बल्कि एक विज्ञान है, एक अनुभव है। यह ना सिर्फ जीभ पर पिघलता है, बल्कि दिल और दिमाग को भी सुकून देता है। विज्ञान अब यह साबित कर चुका है कि डार्क चॉकलेट का संबंध सिर्फ स्वाद से नहीं, बल्कि आपकी यौन शक्ति, इच्छाशक्ति और संबंधों की गुणवत्ता

प्यार, आज़ादी और कई पार्टनर: जब एक रिश्ता कम पड़े, तो दिल दूसरा रास्ता तलाशता है…..

 दिल सिर्फ एक से क्यों बंधे?  आज का ज़माना बदल रहा है, जनाब! अब वो दिन नहीं रहे जब प्यार का मतलब था – “एक ही दिल, एक ही जान, बस एक ही इंसान!” मेट्रो शहरों में रहने वाले नौजवान अब खुलकर कह रहे हैं – “मुझे एक रिश्ता नहीं, पूरा इमोशनल और फिजिकल एक्सपीरियंस

भावनात्मक धोखा बनाम शारीरिक धोखा: रिश्तों की कसौटी पर विश्वास

(जब भरोसा टूटता है मन से या तन से)  आधुनिक रिश्तों की नाजुक डोर  21वीं सदी के संबंध बहुत तेज़ी से विकसित हो रहे हैं। मेट्रो शहरों में रिश्ते अब सिर्फ पारंपरिक सीमाओं में नहीं बंधे, बल्कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन कनेक्शन, और डिजिटल कम्युनिकेशन के ज़रिए भावनात्मक नज़दीकियां पहले से कहीं अधिक आम हो गई

Emotional Intimacy बनाम Physical Intimacy: क्या आज के रिश्तों में भावनाएं कमजोर पड़ गई हैं?

एक नए युग के रिश्तों की सच्चाई:   आज के आधुनिक शहरी समाज में रिश्तों की परिभाषाएं तेजी से बदल रही हैं। अब सिर्फ “रिश्ता” होना काफी नहीं—लोग भावनात्मक और शारीरिक दोनों स्तरों पर संतुलन की तलाश में हैं। लेकिन इस बदलाव में एक ट्रेंड तेजी से उभर रहा है: भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Intimacy) कमजोर होता

मेट्रो शहरों में बदलते रिश्ते और यौन स्वतंत्रता: आधुनिकता की चुनौती और चेतना

यौन स्वतंत्रता या सामाजिक संक्रमण?   भारत के प्रमुख महानगरों—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और हैदराबाद—में बीते एक दशक में सामाजिक संबंधों की परिभाषा तीव्रता से बदली है। अब पहले की तुलना में युवाओं के लिए डेटिंग ऐप्स, लिव-इन रिलेशनशिप, वन-नाइट स्टे और कनसेंशुअल ओपन रिलेशनशिप्स जैसे विचार नई आम बात बनते जा रहे हैं। पश्चिमी प्रभाव

सुरक्षित यौन संबंध: जहाँ प्रेम मिले ज़िम्मेदारी से, और जीवन बने स्वस्थ, सुंदर, संतुलित

जब भी यौन संबंध की बात होती है, समाज में या तो चुप्पी छा जाती है या फुसफुसाहट। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि यौन संबंध इंसानी जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है — यह केवल शारीरिक अनुभव नहीं, बल्कि भावनाओं, विश्वास और जिम्मेदारी से जुड़ा रिश्ता है। और जब यह रिश्ता सुरक्षा के दायरे

मिशन नारी सुरक्षा’ कानून संसद से पारित

18 मई को संसद में ‘मिशन नारी सुरक्षा अधिनियम 2024’ पारित हुआ, जिसमें महिला सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान जैसे फास्ट-ट्रैक अदालतें, सीसीटीवी अनिवार्यता, और डिजिटल शिकायत प्रणाली का समावेश किया गया। यह कानून बलात्कार, दहेज और साइबर अपराध जैसे मामलों की तीव्र सुनवाई सुनिश्चित करेगा।