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महिलाओं के मासिक धर्म (पीरियड्स): स्वस्थ, कुशल और सकुशल जीवन के लिए गाइड

नई दिल्ली 19 अगस्त 2025   मासिक धर्म: जीवन की प्राकृतिक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया मासिक धर्म, जिसे सामान्यतः पीरियड्स कहा जाता है, महिलाओं के जीवन में एक स्वाभाविक और अत्यंत महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया महिला के प्रजनन तंत्र का हिस्सा होती है, जिसमें हर महीने गर्भाशय की आंतरिक परत में बदलाव होता है।

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कामुकता: इंद्रियों के माध्यम से जीवन का सौंदर्य और आनंद

नई दिल्ली 18 अगस्त 2025 कामुकता केवल यौन आकर्षण या शारीरिक इच्छा से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह इंद्रियों और मन की वह संवेदना है जिसके ज़रिए हम जीवन की सुंदरता और गहराई का अनुभव करते हैं। यह एक व्यापक भावना है, जो हमारे आस-पास की चीज़ों—जैसे स्पर्श, आवाज़, खुशबू, स्वाद, और दृश्य अनुभवों—के प्रति

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हवस: यौन इच्छा की तीव्र और जटिल भावना

नई दिल्ली 17 अगस्त 2025 हवस वह तीव्र यौन इच्छा है जो शारीरिक आनंद और तृप्ति की तलाश में उत्पन्न होती है। यह एक स्वाभाविक और जैविक भावना है, जो मनुष्य की प्रजनन प्रवृत्ति से जुड़ी हुई है। हवस का मकसद शारीरिक आकर्षण के माध्यम से सेक्सुअल क्रिया को प्रेरित करना होता है। यह भावना

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प्यार: जीवन की सबसे गहरी और सार्थक अनुभूति

नई दिल्ली 16 अगस्त 2025 प्यार वह भावना है जो मानव जीवन को अर्थ और खूबसूरती प्रदान करती है। यह केवल एक रोमांटिक जुड़ाव या शारीरिक आकर्षण से कहीं अधिक व्यापक और गहरा होता है। प्यार का अर्थ है बिना किसी शर्त के किसी की खुशी और भलाई की इच्छा रखना, उसके दुख-सुख में साथ

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भारतीय मुस्लिम महिलाओं की स्थिति: परंपरा, अधिकार और परिवर्तन की राह

डॉक्टर शालिनी अली, समाजसेवी 16 अगस्त 2025 भारतीय मुस्लिम महिलाएं उस चौराहे पर खड़ी हैं जहां धार्मिक परंपरा, कानूनी अधिकार, राजनीतिक विमर्श और सामाजिक संरचना—चारों का असर एक साथ महसूस होता है। वे एक ऐसे वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं जो न केवल अल्पसंख्यक समुदाय से आता है, बल्कि भीतर ही भीतर लिंग-आधारित बहुसंख्यकवाद का

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प्यार का सेक्स रोमांच देता है और हवस का सेक्स ग्लानि: एक गहरा मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विश्लेषण

सेक्स: केवल शारीरिक क्रिया नहीं, भावनाओं का दर्पण सेक्स केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारी भावनाओं, मानसिकता, और आध्यात्मिकता का भी प्रतिबिंब होता है। जब हम सेक्स को केवल शारीरिक क्रिया के रूप में देखते हैं, तो हम इसके गहरे अर्थों और प्रभावों को नजरअंदाज कर देते हैं। यह क्रिया उस भावनात्मक

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मीडिया और सोशल मीडिया में महिलाओं की छवि: सशक्तिकरण या सीमाओं में कैद?

निपुणिका शाहिद, असिस्टेंट प्रोफेसर, मीडिया स्ट्डीज, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी  नई दिल्ली, 15 अगस्त  विज्ञापन हों या सिनेमा, न्यूज़ चैनल हों या इंस्टाग्राम—आज की दुनिया में महिलाएं हर मंच पर दिखाई देती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दृश्यता उन्हें सशक्त बना रही है या सिर्फ “उपयोग की वस्तु” के रूप

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आज़ादी से आत्मनिर्भरता तक: महिला, बाल विकास और जनकल्याण की राष्ट्रीय यात्रा

प्रस्तावना: स्वतंत्र भारत में सामाजिक पुनर्निर्माण का संकल्प 15 अगस्त 1947 को जब भारत आज़ाद हुआ, तब देश की जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग—महिलाएं और बच्चे—सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से अत्यंत पिछड़े थे। आज़ादी की सुबह केवल राजनैतिक स्वाधीनता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समता की रोशनी भी लेकर आई। संविधान निर्माताओं ने महिलाओं

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उत्तेजना: यौन जीवन की वह जटिल अवस्था जो शरीर और मन को जोड़ती है

नई दिल्ली 14 अगस्त 2025 उत्तेजना यौनिकता की वह अवस्था है जब शरीर और मस्तिष्क दोनों मिलकर यौन क्रिया के लिए तैयार हो जाते हैं। इसे केवल शारीरिक प्रक्रिया समझना अधूरा होगा, क्योंकि यह एक बहु-आयामी अनुभव है जिसमें भावनाएं, मनोवैज्ञानिक स्थितियां, हार्मोन, और तंत्रिकाएं गहरे स्तर पर परस्पर क्रिया करती हैं। उत्तेजना की शुरुआत

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सेक्स: जीवन की जान

नई दिल्ली 13 अगस्त 2025 सेक्स एक ऐसी शारीरिक क्रिया है जो मनुष्य और कई जीवों के जीवन में प्रजनन के लिए अनिवार्य होती है, लेकिन इसके मायने सिर्फ जैविक स्तर तक सीमित नहीं हैं। यह एक गहरा और जटिल सामाजिक, भावनात्मक, और मानसिक अनुभव भी है जो दो व्यक्तियों के बीच आत्मीयता, विश्वास, और