
जम्मू-कश्मीर की कारीगरी: आत्मा की भाषा, हाथों की विरासत”
हस्तकला की आत्मा: परंपरा की सांस लेती कलाएं जम्मू-कश्मीर की हस्तकला केवल वस्तुएं नहीं बनाती, वह समय के साथ बुनी गई एक जीवंत परंपरा है। सदियों से कश्मीर की वादियों में कारीगरों की उंगलियों ने धागों, लकड़ियों, धातुओं और रंगों को आत्मा दी है। यहां की कला फारसी, तुर्क, तिब्बती और स्थानीय परंपराओं का संगम









