मदरसे से मॉडर्निटी तक – भारतीय मुस्लिम शिक्षा व्यवस्था का नया नक्शा
एक समय था जब मदरसे की पढ़ाई का मतलब केवल दीन की तालीम और धार्मिक ग्रंथों तक सीमित समझा जाता था। लेकिन आज का भारत
एक समय था जब मदरसे की पढ़ाई का मतलब केवल दीन की तालीम और धार्मिक ग्रंथों तक सीमित समझा जाता था। लेकिन आज का भारत
भाषा और ज्ञान: आत्मा और दिशा का संगम मनुष्य की सबसे बड़ी ताक़त उसकी सोच और अभिव्यक्ति है, और ये दोनों ही भाषा और ज्ञान
“अब्बा, मैं IAS बन गया!” – यह एक लाइन सिर्फ भावनाओं का इज़हार नहीं, बल्कि भारत के मुस्लिम समाज के सपनों की ऊँचाई और मेहनत
“अब नौकरी ढूंढनी नहीं, नौकरी देनी है” – यह जुमला अब मुस्लिम युवाओं का नारा बन चुका है। देश में स्टार्टअप इंडिया मिशन और डिजिटल
— शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ मानव भूमिका को सुरक्षित रखने की पहल 24 जनवरी 2025 को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पूरे देश में व्यापक
जनवरी 2025 में शिक्षा के क्षेत्र में दो राज्यों—तमिलनाडु और गुजरात—से संबंधित RTE (Right to Education) कानून के तहत दो अहम खबरें सामने आईं। तमिलनाडु
कभी मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा को लेकर समाज में संशय था, सवाल थे, और रुकावटें थीं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, सोच बदल रही
एक लंबे समय से विवादों, भ्रष्टाचार और उपेक्षा का शिकार रही वक़्फ़ संपत्तियाँ अब एक नई दिशा की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। केंद्र
23 मार्च को केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति 2.0 का मसौदा जारी किया। इसमें पूर्व-प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक में तकनीकी एकीकरण, मातृभाषा
डिग्री: क्या यह सफलता की गारंटी है? सालों से हमारे समाज में एक धारणा पक्की होती चली आ रही है — “अच्छी डिग्री = अच्छी