
सहारा की राख और कॉर्पोरेट की भूख: भरोसे की विरासत से कब्ज़े तक की कहानी
सपनों का वो कारवां जो भरोसे पर चला: जब एक आदमी ने परिवार बनाया, उद्योग नहीं कभी भारत के हर गाँव, हर कस्बे में “सहारा” शब्द एक भावनात्मक पहचान था — एक ऐसा नाम जो सुरक्षा, सम्मान और अटूट विश्वास का प्रतीक था। सुब्रत रॉय सहारा, जिन्होंने सत्तर के दशक में उत्तर प्रदेश की गोरखपुर









