एबीसी नेशनल न्यूज 16 जनवरी 2026
एक कथित धर्मगुरु सतुआ बाबा के बयान ने देशभर में तीखी बहस और आक्रोश को जन्म दे दिया है। सतुआ बाबा ने सार्वजनिक मंच से दावा किया कि “सनातनी क्या 4 करोड़ की कार से नहीं चल सकते” और इसके साथ ही उन्होंने धर्म को नहीं मानने वालों को “इन्हीं कारों की रफ्तार से रौंद देने” जैसी भड़काऊ और हिंसक टिप्पणी कर दी। यह बयान सामने आते ही सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इसकी कड़ी निंदा शुरू हो गई है।
आलोचकों का कहना है कि किसी भी धर्म के नाम पर इस तरह की धमकी न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि समाज में नफरत और डर का माहौल पैदा करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सार्वजनिक मंच से हिंसा भड़काने वाले बयान सीधे तौर पर सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला हैं। ऐसे वक्त में जब देश को शांति और संवाद की जरूरत है, इस तरह की भाषा स्थिति को और बिगाड़ सकती है।
इस बयान पर कई सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने सवाल उठाए हैं कि क्या कानून ऐसे बयानों पर चुप रहेगा। उनका कहना है कि धार्मिक पहचान के नाम पर किसी भी वर्ग को डराने-धमकाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। मांग की जा रही है कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान ले और भड़काऊ बयान देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। आम लोगों में भी इस बयान को लेकर नाराज़गी है। लोगों का कहना है कि आस्था का मतलब हिंसा या धमकी नहीं होता, बल्कि इंसानियत, सह-अस्तित्व और कानून का सम्मान होता है। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों पर लगाम कब और कैसे लगेगी।




