एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 14 मार्च 2026
भारत में स्तन कैंसर के मामलों में पिछले तीन दशकों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मेडिकल जर्नल The Lancet Oncology में प्रकाशित ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी’ के मुताबिक वर्ष 1990 से 2023 के बीच देश में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगभग 477.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इससे होने वाली मौतों की संख्या 352.3 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
अध्ययन के अनुसार वर्ष 2023 में भारत में करीब 2.03 लाख महिलाओं में स्तन कैंसर के नए मामले सामने आए, जबकि 1.02 लाख महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते रोकथाम और जांच पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में यह बीमारी और भी गंभीर रूप ले सकती है।
दुनिया भर में बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में दुनिया भर में लगभग 23 लाख महिलाओं में स्तन कैंसर के नए मामले दर्ज किए गए, जबकि 7.6 लाख से अधिक महिलाओं की मौत इस बीमारी से हुई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो 2050 तक यह संख्या बढ़कर 35 लाख नए मामलों और करीब 14 लाख मौतों तक पहुंच सकती है।
भारत में क्यों बढ़ रहे मामले
डॉक्टरों के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर का कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि कई जीवनशैली और जैविक कारण इसके जोखिम को बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा, शराब का अधिक सेवन, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और पारिवारिक इतिहास इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
दिल्ली के All India Institute of Medical Sciences के विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण भी एक बड़ा कारण बनकर उभर रहा है। जिन क्षेत्रों में PM2.5 प्रदूषण का स्तर अधिक होता है, वहां रहने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा लगभग 28 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
कम उम्र की महिलाओं में भी खतरा
रिपोर्ट के अनुसार 1990 के बाद से 20 से 54 वर्ष की महिलाओं में भी स्तन कैंसर के मामलों में करीब 29 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि अब यह बीमारी सिर्फ अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि देर से शादी, पहली गर्भावस्था में देरी, कम स्तनपान और बदलती जीवनशैली भी इसके पीछे प्रमुख कारण बन रहे हैं।
समय पर जांच से बच सकती है जान
डॉक्टरों के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर का समय रहते पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। इसके लिए मैमोग्राफी, एमआरआई, पीईटी स्कैन और थर्मोग्राफी जैसी आधुनिक जांच तकनीकें उपलब्ध हैं।
ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि 35 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित रूप से स्क्रीनिंग करानी चाहिए। यदि स्तन में छोटी सी गांठ या असामान्य बदलाव महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं सामाजिक झिझक, जागरूकता की कमी और इलाज के खर्च के डर की वजह से समय पर जांच नहीं करातीं। यही कारण है कि देश में लगभग 60 प्रतिशत मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब कैंसर तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुका होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्क्रीनिंग, समय पर जांच और बेहतर इलाज की व्यवस्था मजबूत की जाए तो हजारों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है।




