पटना/ नई दिल्ली 11 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में आज मतदान के दौरान एक बार फिर वही पुराना और खतरनाक खेल सामने आया, जिसने पहले चरण में भी लोकतंत्र की नींव को हिलाकर रख दिया था—दो-दो वोटर वाला खेल। पहले चरण में प्रोफेसर राकेश सिन्हा सहित बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता पकड़े गए थे, जिनके पास दो-दो EPIC IDs थीं और जो अलग-अलग राज्यों में वोट डालने का रिकॉर्ड रखते थे। चौंकाने वाली बात यह थी कि ये दोहरी पहचान वाले लगभग सभी मतदाता भाजपा से जुड़े हुए पाए गए थे, जिनकी दो राज्यों में सक्रिय मतदान की गतिविधियां लोकतांत्रिक नैतिकता पर एक बड़ा सवाल बनकर उभरीं। चुनाव आयोग की अनदेखी और प्रशासनिक चुप्पी ने इसे और गंभीर बना दिया है।
दूसरे चरण में भी यही घालमेल नए चेहरों के साथ लौट आया है। आज ऐसे घपलेबाज़ वोटरों की मानो झड़ी लगी हुई है। ताज़ा खुलासा अजीत कुमार झा का है—जो @OpIndia_in के कर्मचारी बताए जा रहे हैं। उनके पास भी दो EPIC IDs सामने आई हैं: एक हरियाणा के फरीदाबाद की और दूसरी बिहार के मधुबनी की। हैरानी की बात यह है कि झा ने न केवल आज बिहार में मतदान किया, बल्कि इससे पहले 5 अक्टूबर 2024 को हरियाणा विधानसभा चुनाव में फरीदाबाद में भी अपना वोट डाल चुके हैं। यह सामान्य भूल नहीं, बल्कि सुनियोजित दोहरा मतदान है, जिसे किसी भी लोकतंत्र में ‘घोर अपराध’ माना जाता है। इससे भी गंभीर बात यह है कि यह सिर्फ उन्हीं तक सीमित नहीं—उनके पिता, मिथिलेश झा, के पास भी दो EPIC IDs हैं—एक बिहार से और दूसरी हरियाणा से। यानी पिता-पुत्र दोनों दो राज्यों में वोट डालने के पात्र बनाए गए और दोनों का पैटर्न एक जैसा है।
इस दोहरे मतदान के सिलसिले ने यह साफ कर दिया है कि बिहार चुनाव में सिर्फ राजनीतिक दांव-पेच ही नहीं, बल्कि ‘वोट चोर’ मॉड्यूल और डिजिटल फर्जीवाड़ा भी एक बड़ी वास्तविकता बन चुका है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि भाजपा ‘वोट चोर अभियान’ को सिस्टमेटिक तरीके से चला रही है, जिसमें उनके समर्थकों को दोहरी मतदाता पहचान देकर दो राज्यों में मतदान करवाया जा रहा है। लोकतंत्र के लिए यह एक खतरनाक संकेत है—जहां जनता की एक-एक वोट की कीमत है, वहीं दो-दो वोटरों का खेल पूरे चुनाव को संदिग्ध बना देता है।
पहले चरण में मिले सबूतों के बावजूद, दूसरे चरण में भी यह खेल खुलेआम जारी रहा, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या चुनाव आयोग इस पूरे खेल का केवल ‘आंख मूंदकर गवाह’ है या फिर इस संगठित फर्जीवाड़े को राजनीतिक छूट मिली हुई है? लोकतंत्र को बचाने के लिए यह ज़रूरी है कि इस दोहरे मतदान पर तुरंत कार्रवाई हो, EPIC IDs की फॉरेंसिक जांच कराई जाए, दोषियों पर FIR दर्ज हो और सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए। क्योंकि अगर एक वोटर दो बार वोट डाल सकता है, तो लोकतंत्र एक बार में ही खत्म हो सकता है।







