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बीजेपी की फर्जी वोटर फैक्ट्री — लोकतंत्र की लाश पर जश्न मनाता सिस्टम

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एबीसी एक्सक्लूसिव | पटना/ नई दिल्ली 8 नवंबर 2025

बिहार में इस बार जो कुछ हुआ, वह लोकतंत्र के माथे पर कलंक की तरह दर्ज होगा। प्रथम चरण के मतदान के बाद सामने आई सूचनाएँ यह बताती हैं कि वोट चोरी की एक संगठित फैक्ट्री पूरे तंत्र में सक्रिय थी — और इस बार इसका सबसे बड़ा केंद्र बिहार बना। हैरानी की बात यह है कि इस जालसाज़ी में वे लोग भी शामिल पाए गए हैं जो खुद को राष्ट्रवाद का ठेकेदार और नैतिकता का शिक्षक बताते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी के अनेक पदाधिकारी और समर्थक ऐसे पाए गए हैं जिन्होंने एक से अधिक राज्यों में मतदान किया है। कोई दिल्ली में वोट डालकर बिहार पहुंच गया, कोई हरियाणा या राजस्थान से निकलकर यहां आया, तो कोई उत्तराखंड में पहले मतदान कर चुका था और अब बिहार की सूची में भी शामिल पाया गया। यह कोई सामान्य गलती नहीं, संगठित और सुनियोजित वोट चोरी का नेटवर्क है, जिसका लक्ष्य लोकतंत्र की पवित्रता को दूषित करना है।

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इसी नेटवर्क का सबसे चौंकाने वाला नाम सामने आया है — प्रोफेसर राकेश सिन्हा, जो न केवल बीजेपी के विचारक कहे जाते हैं बल्कि राज्यसभा के पूर्व सांसद भी रह चुके हैं। वही राकेश सिन्हा जिनकी पहचान संघ से निकटता और “राष्ट्रनीति के गुरु” के रूप में बनाई गई थी, उन पर अब सवाल है कि उन्होंने दो राज्यों में मतदान कैसे किया? यह वही सवाल है जो इस पूरे ‘संगठित पाप’ का चेहरा उजागर करता है। एक तरफ वे देशभक्ति और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, दूसरी ओर चुनावी ईमानदारी को रौंदते हैं। लोकतंत्र का यह दोहरापन कहीं अधिक खतरनाक है क्योंकि यह व्यवस्था के भीतर से आ रहा है।

इसके बाद एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया — एनडीए सांसद शांभवी चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने एक से अधिक स्थानों पर वोट डाला। चुनाव आयोग की छाप वाली स्याही उनके दोनों हाथों की उंगलियों पर देखी गई, जिससे यह प्रमाणित होता है कि मतदान दो बार हुआ। लेकिन सवाल यह है कि जब सत्ता की पार्टी से जुड़े लोग ही आचार संहिता का मज़ाक उड़ाएँ, तो आम नागरिक का भरोसा किस पर रहेगा? बिहार से लेकर दिल्ली तक, वोट चोरी की फैक्ट्री चलाने वालों को संरक्षण मिला हुआ प्रतीत होता है। और इस पूरे खेल का सूत्रधार कौन है, यह जानने की कोशिश में पूरा देश अब सवाल पूछ रहा है।

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और अब इस कड़ी में जुड़ गया है एक और नाम — प्रभात कुमार, जो बीजेपी किसान मोर्चा में उत्तराखंड के सोशल मीडिया सह प्रभारी हैं। यह वही प्रभात हैं जो देहरादून में रहते हैं, परंतु ट्रेन पकड़कर बिहार पहुंचे ताकि “लोकतंत्र की चोरी” में भागीदारी निभा सकें। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस पूरी मानसिकता की झलक है जो चुनाव को ‘इवेंट’ और वोट को ‘संपत्ति’ मानती है।

प्रभात कुमार का रिकॉर्ड खुद सब कुछ कहता है —

बीजेपी नेता प्रभात कुमार का उत्तराखंड वाला EPIC नंबर (मतदाता पहचान संख्या) अब भी सक्रिय है, जबकि सवाल यह है कि जिस व्यक्ति का वोटर आईडी देहरादून, उत्तराखंड का है, वह बिहार में जाकर वोट कैसे डाल सकता है। 2024 में मतदान के समय ली गई उनकी तस्वीर के बैकग्राउंड की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि उनका मतदान केंद्र “सनातन धर्म इंटर कॉलेज, रेसकोर्स रोड, देहरादून” था और उसमें दर्ज पिता का नाम भी रिकॉर्ड से मेल खाता है। इतना ही नहीं, उनका बिहार का EPIC नंबर भी मौजूद है, हालांकि उसे दोबारा पुष्टि के बाद ही साझा किया जाएगा। यह पूरा मामला चुनाव आयोग की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है — आखिर ऐसे दोहरे वोटर कैसे बनते हैं और इतने बड़े पैमाने पर यह फर्जीवाड़ा किसकी निगरानी में चल रहा है।

  1. 8 नवंबर, 2025: बिहार में मतदान किया।
  1. 23 जनवरी, 2025: उत्तराखंड देहरादून नगर निगम चुनाव में वोट डाला।
  1. 19 अप्रैल, 2024: उत्तराखंड लोकसभा चुनाव में वोट डाला।
  1. 14 फरवरी, 2022: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में मतदान किया।
  1. 11 अप्रैल, 2019: उत्तराखंड लोकसभा चुनाव में वोट डाला।
  1. 18 नवंबर, 2018: देहरादून नगर निगम चुनाव में वोट डाला।

यह सिलसिला बताता है कि कैसे “वोट चोर संस्कृति” बीजेपी के भीतर तक है — जहां लोकतंत्र की आत्मा की जगह राजनीतिक लाभ का तंत्र खड़ा कर दिया गया है। जो लोग राष्ट्रवाद के नाम पर भाषण देते नहीं थकते, वे ही लोकतंत्र की बुनियाद में छेद कर रहे हैं। बिहार से लेकर दिल्ली तक फैली यह फर्जी वोटर फैक्ट्री यह बताती है कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा खतरा विपक्ष नहीं, बल्कि वह सत्ता है जिसने “वोट” को भी व्यापार बना डाला है। विपक्ष का आरोप है कि वोट चोरी के गिरोह में जो सबसे बड़ा टूल है वो है चुनाव आयोग। जो अपने आकाओं के इशारे पर सब कुछ करता है। चुनाव आयोग ने पहले ही 67 लाख वोटर्स बिहार की मतदाता सूची से हटाए थे और 33 लाख नए मतदाता जोड़ कर एक करोड़ मतदाताओं का खेल कर रखा है। 

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इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले ही अपने संवाददाता सम्मेलन में सभी तथ्यों सभी साक्ष्यों के साथ साबित कर चुके हैं कि हरियाणा चुनाव बीजेपी चोरी कर के जीती है। हरियाणा का चुनाव कांग्रेस ने जीता था। लेकिन हरियाणा में 25 लाख मतों का खेल हुआ और चुनाव चोरी से बीजेपी को जिताया गया।

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