नई दिल्ली 10 नवंबर।
दिल्ली की ठंडी होती रातों के बीच रविवार को ठीक 11:30 बजे एक ऐसी आवाज़ हमेशा के लिए थम गई, जिसने मंच के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में जोश, ऊर्जा और सकारात्मकता की लहर भर दी थी। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के वरिष्ठ अधिकारी, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और ‘हिंदुस्तान फ़र्स्ट हिंदुस्तानी बेस्ट’ जैसे बौद्धिक विंग को खड़ा करने वाले बिलाल उर रहमान अब इस दुनिया में नहीं रहे। बिलाल उर रहमान के निधन पर राष्ट्रीय संयोजक और मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने कहा कि—“मंच ने आज अपना एक बेहद कर्मठ, ईमानदार और निस्वार्थ सिपाही खो दिया। बिलाल भाई का जाना हमारे लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक, दोनों स्तरों पर अपूरणीय क्षति है।”
19 अक्टूबर की रात अचानक हुए ब्रेन हैमरेज के बाद से वे दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थे—लगातार संघर्ष करते हुए, उपचार के हर चरण से गुज़रते हुए—मगर हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते रहे, और अंततः वे लंबी बेहोशी तथा कोमा की स्थिति से निकल नहीं सके।
मंच के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार ने पूर्व मदरसा बोर्ड चेयरमैन बिलाल उर रहमान के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिलाल न सिर्फ़ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के एक सक्रिय और भरोसेमंद स्तंभ थे बल्कि सकारात्मक राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता के सच्चे वाहक थे। इंद्रेश कुमार ने उन्हें एक ईमानदार, शांत स्वभाव वाले, राष्ट्रहित के प्रति समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनका जाना मंच और समाज—दोनों के लिए अपूरणीय क्षति है।
National Commission for Minority Educational Institutions के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि केवल 54 साल की उम्र में संसार को अलविदा कह जाना किसी असमय ढहते पहाड़ जैसा है। उनका जमा अविश्वसनीय और गहरा आघात पहुंचाने वाला है।
जामिया हमदर्द के रजिस्ट्रार कर्नल ताहिर ने कहा कि बिलाल उर रहमान एक जुझारू योद्धा थे—विचारों के, संगठन के, और समाज सेवा के। उनकी आवाज़ एक बुलंद संदेश थी कि मुसलमान समाज को आत्मविश्वास, शिक्षा, विकास और देशभक्ति के रास्ते पर ले जाना समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
परिवार में उनकी पत्नी, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय संयोजक और महिला विभाग की प्रमुख डॉ. शालिनी अली, और उनके बच्चे हैं। यह क्षति सिर्फ़ एक परिवार की नहीं, बल्कि एक पूरे विचार-समूह की है जिसने उन्हें एक मार्गदर्शक, योजनाकार और कुशल रणनीतिकार की तरह देखा था।
उनकी बीमारी से लेकर अंतिम क्षण तक सरकार और मंच के वरिष्ठों ने हर संभव प्रयास किया। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजीजू, और मंच के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार ने अपने स्तर पर स्वास्थ्य की प्रगति और बेहतर से बेहतर उपचार के अथक प्रयास किए। डॉ शालिनी ने इस बीच दिन रात एक कर उनके बेहतरी के प्रयास किया। मगर नियति ने कुछ और ही लिख रखा था। 20 दिनों तक कौमा में रहने के बाद बिलाल उर रहमान चल बसे।
मंच के सभी वरिष्ठों–कनिष्ठों, कार्यकर्ताओं, सहयोगियों तथा देशभर में मंच से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके प्रति गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि उन्होंने मुस्लिम समाज में सकारात्मक राष्ट्रवाद की सोच को मजबूती से खड़ा करने में अभूतपूर्व योगदान दिया।
वो अब नहीं हैं, मगर उनके विचार, उनका संघर्ष, उनकी मुस्कान, और उनकी अद्भुत संगठन क्षमता हमेशा याद रखी जाएगी। उनकी यात्रा भले थम गई हो, लेकिन उनके सपनों की राह लाखों दिलों में आगे बढ़ती रहेगी।





I feel like losing my close relative in his passing away. The news came as a deep shock to me and my wife. We pray to God to grant him eternal peace and give enough strength to his wife and sons and other family members to bear the loss. Amen.