अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रियाद / ढाका | 25 अप्रैल 2026
म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब 22 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों को अब बांग्लादेश की नागरिकता मिल गई है, जिसके पीछे सऊदी अरब की अहम भूमिका बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, सऊदी अरब के दबाव के बाद बांग्लादेश सरकार ने इन शरणार्थियों को पासपोर्ट जारी किए हैं। बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जो रोहिंग्या वैध तरीके से बांग्लादेश से सऊदी अरब काम करने गए थे, उन्हें पहचान और कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
बताया जा रहा है कि सऊदी अरब में बड़ी संख्या में रोहिंग्या बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे थे, जिससे उनकी निगरानी और कानूनी स्थिति को लेकर परेशानी हो रही थी। ऐसे में सऊदी सरकार चाहती है कि सभी के पास वैध दस्तावेज हों, ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके और रोजगार के अवसर भी सुचारू रूप से मिल सकें।
सऊदी अरब के अधिकारियों का यह भी कहना है कि अभी भी हजारों रोहिंग्या ऐसे हैं, जिनके पास पासपोर्ट नहीं है। ऐसे लोगों के लिए भी बांग्लादेश से जल्द दस्तावेज जारी करने की मांग की गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सऊदी अरब की यह पहल सिर्फ मानवीय नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। एक तरफ वह अपने देश में अवैध प्रवासियों पर नियंत्रण चाहता है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य में उन्हें वापस भेजने की स्थिति भी स्पष्ट रखना चाहता है।
वहीं बांग्लादेश के लिए यह फैसला आसान नहीं था। देश पहले ही 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थियों का बोझ उठा रहा है। आर्थिक दबाव, खाद्य संकट और बढ़ते सामाजिक तनाव के बीच वह नहीं चाहता कि और शरणार्थी वापस लौटें।
इसके अलावा सऊदी अरब और बांग्लादेश के बीच मजबूत आर्थिक और व्यापारिक संबंध भी इस फैसले के पीछे एक बड़ा कारण माने जा रहे हैं। सऊदी में लाखों बांग्लादेशी काम करते हैं और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता है।
रोहिंग्या संकट अब सिर्फ मानवीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, आर्थिक दबाव और कूटनीतिक संतुलन का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।




