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भारत में पढ़े बालेन शाह संभालेंगे नेपाल की कमान, क्या दिल्ली और काठमांडू की दूरियां होंगी कम?

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली/काठमांडू | 8 मार्च 2026

नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आता दिखाई दे रहा है। काठमांडू के चर्चित मेयर और युवा नेता बालेन शाह अब देश की सत्ता के केंद्र में पहुंचते नजर आ रहे हैं। ताजा चुनावी नतीजों में उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने अप्रत्याशित प्रदर्शन किया है और पारंपरिक राजनीतिक दलों को कड़ी चुनौती देते हुए सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है।

चुनाव परिणामों में सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब बालेन शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को झापा-5 सीट से बड़े अंतर से हराकर नेपाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। यह जीत सिर्फ एक सीट की नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे नेपाल की राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से सत्ता में रहे पुराने दलों के मुकाबले शाह युवाओं और नए राजनीतिक विमर्श के प्रतीक बनकर उभरे हैं।

बालेन शाह की लोकप्रियता का आधार उनकी साफ-सुथरी छवि और काठमांडू के मेयर के रूप में किए गए कामों को माना जाता है। 2022 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था। राजधानी में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई, प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता की पहल ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। यही लोकप्रियता अब राष्ट्रीय राजनीति में भी दिखाई दे रही है।

बालेन शाह की एक खास पहचान यह भी है कि उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा भारत में हासिल की। उन्होंने कर्नाटक की विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया था। भारत में पढ़ाई के दौरान उनका संपर्क भारतीय समाज और यहां की राजनीतिक समझ से भी हुआ। यही कारण है कि उनकी संभावित सरकार को भारत-नेपाल संबंधों के नजरिए से भी काफी अहम माना जा रहा है।

भारत और नेपाल के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बेहद गहरे रहे हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा, धार्मिक आस्था और व्यापारिक रिश्ते दशकों से चले आ रहे हैं। ऐसे में अगर बालेन शाह नेपाल की कमान संभालते हैं तो यह देखना दिलचस्प होगा कि नई दिल्ली और काठमांडू के रिश्तों में किस तरह की नई दिशा सामने आती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा नेतृत्व के रूप में बालेन शाह एक संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने अतीत में नेपाल की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को लेकर कई बार मजबूत बयान दिए हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग और विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

नेपाल की जनता ने इस चुनाव में जिस तरह बदलाव के पक्ष में मतदान किया है, उससे साफ संकेत मिलता है कि देश पारंपरिक राजनीति से आगे बढ़कर नई सोच और नई नेतृत्व शैली को मौका देना चाहता है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या युवा नेता बालेन शाह नेपाल को नई राजनीतिक दिशा देने के साथ-साथ दिल्ली और काठमांडू के रिश्तों को भी नई मजबूती दे पाएंगे।

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