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CJI पर हमला संविधान की आत्मा पर वार, मोदी की चुप्पी मौन सहमति जैसी : कांग्रेस

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मुख्य न्यायाधीश पर हुए हमले को लेकर देश की सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए कहा कि यह हमला केवल न्यायपालिका की गरिमा पर नहीं, भारत के संविधान की आत्मा पर सीधा प्रहार है। कांग्रेस ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर सुप्रीम कोर्ट के अंदर खुलेआम हमला किया गया लेकिन फिर भी अब तक प्रधानमंत्री की ओर से एक शब्द की भी निंदा नहीं की गई। कांग्रेस ने कहा कि मोदी की यह चुप्पी बेहद खामोश होकर भी बहुत कुछ कह रही है — यह सहमति जैसी लगती है। उनको इस पर बोलना ही होगा।

सीपीपी अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी का बयान

सुप्रीम कोर्ट के भीतर ही भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश पर हुए हमले की निंदा के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है। यह हमला केवल उन पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान पर भी सीधा आघात है। मुख्य न्यायाधीश गवई ने अत्यंत संयम और गरिमा का परिचय दिया है, लेकिन राष्ट्र को उनके साथ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए — गहरी पीड़ा और आक्रोश की भावना के साथ।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा 

 “The attack on the Chief Justice of India is an assault on the dignity of our judiciary and the spirit of our Constitution.” उन्होंने जोर देकर कहा कि नफरत और हिंसा जैसी प्रवृत्तियों की कोई जगह भारत जैसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक देश में नहीं हो सकती।

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि नफरत फैलाने वाले लोग देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “ऐसे कृत्यों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। देश के संवैधानिक पदों की गरिमा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है।”

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब जस्टिस बी.आर. गवई पर हमले की खबर ने पूरे देश में आक्रोश और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है कि अब तक किसी केंद्रीय मंत्री या बीजेपी नेता ने इस घटना की निंदा क्यों नहीं की।

प्रियंका गांधी का बयान

माननीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर हमले की कोशिश अत्यंत शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। यह सिर्फ देश के मुख्य न्यायाधीश पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान, संपूर्ण न्याय व्यवस्था और कानून के शासन पर हमला है। माननीय मुख्य न्यायाधीश ने अपनी मेहनत, लगन और योग्यता के दम पर समाज के सारे बंधनों को तोड़कर सर्वोच्च न्यायिक पद हासिल किया है। उनपर इस तरह का हमला न्यायपालिका और लोकतंत्र – दोनों के लिए घातक है। इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है।

कांग्रेस का बयान 

कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चुप्पी को “खतरनाक संकेत” बताते हुए कहा है कि “लोकतंत्र के चार स्तंभों में से एक न्यायपालिका पर हमला, लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है।” पार्टी का कहना है कि जब न्यायपालिका पर हमला होता है, तो यह केवल किसी व्यक्ति पर नहीं बल्कि न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों पर वार होता है — और ऐसे समय में सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में है।

 

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