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बढ़ती गर्मी के बीच AC बन रहे आग का खतरा? दिल्ली अग्निकांड के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

राष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | नई दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS

दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में हुई भीषण आग की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। आग लगने के कारणों की जांच अभी जारी है और अधिकारियों ने किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में बेसमेंट में रखे गए व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर और एक संभावित खराब एयर कंडीशनर को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आग का वास्तविक कारण क्या था, लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर उस खतरे की ओर देश का ध्यान खींचा है जो हर साल गर्मियों में सामने आता है—एयर कंडीशनर और बिजली से जुड़ी आग की घटनाएं। बढ़ते तापमान और लगातार बढ़ती बिजली खपत के बीच यह सवाल अब गंभीर होता जा रहा है कि क्या भारत के घर, होटल, अस्पताल, स्कूल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस बढ़ते दबाव को सुरक्षित ढंग से संभालने के लिए तैयार हैं।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का सामना किया है। राजधानी दिल्ली से लेकर राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में एयर कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ी है और लाखों नए AC हर साल बाजार में बिक रहे हैं। पहले जहां लोग कुछ घंटों के लिए एयर कंडीशनर का उपयोग करते थे, वहीं अब कई घरों, होटलों और कार्यालयों में AC दिन-रात लगातार चल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एयर कंडीशनर अपने आप में उतने खतरनाक नहीं होते, जितना उनसे जुड़ा बिजली का ढांचा होता है। यदि भवन की वायरिंग पुरानी हो, लोड क्षमता कम हो या उपकरणों का रखरखाव सही तरीके से न किया जाए तो दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि गर्मियों में आग लगने की घटनाओं में बड़ी संख्या बिजली से जुड़े उपकरणों और शॉर्ट सर्किट से संबंधित होती है।

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तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार एयर कंडीशनर के लगातार संचालन से बिजली की खपत और वायरिंग पर दबाव बढ़ता है। यदि तारों की गुणवत्ता खराब हो, जोड़ ढीले हों या बिजली के पैनल पुराने हों तो उनमें अत्यधिक गर्मी पैदा होने लगती है। यह गर्मी धीरे-धीरे शॉर्ट सर्किट का रूप ले सकती है और फिर कुछ ही मिनटों में आग पूरी इमारत में फैल सकती है। कई बार लोग कम लागत के लिए स्थानीय स्तर के तारों, सस्ते सर्किट ब्रेकरों और गैर-प्रमाणित तकनीशियनों का सहारा लेते हैं, जो भविष्य में गंभीर खतरे का कारण बनते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एयर कंडीशनर की खरीद के साथ-साथ उसके लिए उपयुक्त बिजली व्यवस्था का होना भी उतना ही आवश्यक है, लेकिन अधिकांश लोग इस पहलू को नजरअंदाज कर देते हैं।

एक और बड़ी समस्या एयर कंडीशनरों की नियमित सर्विसिंग को लेकर है। देश में लाखों लोग वर्षों तक अपने AC का उपयोग करते हैं लेकिन उसकी तकनीकी जांच नहीं कराते। धूल और गंदगी जमा होने से कूलिंग सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। गैस लीकेज, खराब कंप्रेसर, जली हुई वायरिंग या ढीले कनेक्शन जैसी समस्याएं धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर वर्ष गर्मियों की शुरुआत से पहले एयर कंडीशनर की पूरी तकनीकी जांच करानी चाहिए। इससे न केवल बिजली की बचत होती है बल्कि दुर्घटना की संभावना भी काफी कम हो जाती है।

दिल्ली के हालिया हादसे ने होटलों, गेस्ट हाउसों और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई भवनों में अग्निशमन उपकरण केवल कागजों तक सीमित रहते हैं। कहीं फायर अलार्म काम नहीं करते तो कहीं आपातकालीन निकास मार्ग अवरुद्ध पाए जाते हैं। यदि आग लग भी जाए तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी और बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए फायर सेफ्टी ऑडिट को और अधिक सख्ती से लागू करने की जरूरत है। केवल लाइसेंस जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय-समय पर स्वतंत्र निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

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विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में तापमान और बढ़ने की संभावना है। जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की अवधि लंबी हो रही है और शहरी क्षेत्रों में हीट आइलैंड प्रभाव भी बढ़ रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि एयर कंडीशनर का उपयोग और अधिक बढ़ेगा। ऐसे में यदि बिजली ढांचे, भवन सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्थाओं को समय रहते मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं की संख्या बढ़ सकती है। सरकार, स्थानीय प्रशासन, भवन मालिकों और आम नागरिकों सभी को इस चुनौती को गंभीरता से लेना होगा।

फिलहाल दिल्ली अग्निकांड की जांच जारी है और यह संभव है कि अंतिम रिपोर्ट में आग का कारण कुछ और सामने आए। लेकिन इस घटना ने पूरे देश को एक महत्वपूर्ण संदेश जरूर दिया है कि बढ़ती गर्मी के दौर में केवल ठंडक हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ठंडक को सुरक्षित बनाना भी उतना ही जरूरी है। यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी रही तो एयर कंडीशनर से मिलने वाली राहत कभी-कभी बड़े हादसों की वजह भी बन सकती है।

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