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होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो दुनिया में तेल संकट तय, अरामको चीफ ने दी गंभीर चेतावनी

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एबीसी नेशनल न्यूज | अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 10 मार्च 2026

मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच गहराते टकराव के बीच वैश्विक तेल बाजार को लेकर गंभीर चेतावनी सामने आई है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको के प्रमुख ने कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होता है तो इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर बेहद खतरनाक हो सकता है।

दुनिया की तेल आपूर्ति की जीवनरेखा है होर्मुज

अरामको के प्रमुख के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति की सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि युद्ध की स्थिति में यह मार्ग बाधित होता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति अचानक कम हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से उछल सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देशों से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक जाने वाले तेल टैंकरों का प्रमुख रास्ता यही जलडमरूमध्य है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या अवरोध वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

मध्यपूर्व युद्ध से बढ़ी वैश्विक चिंता

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पहले ही दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में कई तेल टैंकर कंपनियों और शिपिंग एजेंसियों ने इस क्षेत्र में जोखिम बढ़ने की बात कही है। अगर स्थिति और बिगड़ती है तो ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर पड़ सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से न सिर्फ तेल बल्कि गैस की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और कई देशों में ईंधन महंगा हो सकता है।

भारत सहित कई देशों पर पड़ेगा असर

तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंताजनक मानी जा रही है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल मिलता है। यदि होर्मुज में आवाजाही बाधित होती है तो इन देशों की ऊर्जा लागत बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है और जलमार्ग बंद होता है तो दुनिया को 1970 के दशक जैसे तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

राजनयिक समाधान की जरूरत

इस बीच कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने कहा है कि मध्यपूर्व में तनाव कम करने के लिए तत्काल कूटनीतिक पहल की जरूरत है। उनका मानना है कि यदि संघर्ष का विस्तार हुआ तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।

मध्यपूर्व की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वैश्विक बाजार और ऊर्जा कंपनियां अब आने वाले दिनों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा फिलहाल पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गई है।

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