महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 23 दिसंबर 2025
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर का एक ऑडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कांग्रेस का कहना है कि इस ऑडियो में सुरेश राठौर अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े गंभीर खुलासे करते हुए सुनाई दे रहे हैं। पार्टी के अनुसार, इस ऑडियो में आरोप लगाया गया है कि अंकिता की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया जा रहा था। कांग्रेस ने इन आरोपों को “बेहद गंभीर और शर्मनाक” बताया है।
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सत्ता का दुरुपयोग, सबूत मिटाने की कोशिश और प्रभावशाली लोगों को बचाने की साजिश की तस्वीर भी सामने आती है। पार्टी ने याद दिलाया कि घटना के समय अंकिता के कमरे को बुलडोजर से तोड़ा गया था और कथित तौर पर उसके बिस्तर को जलाने की कोशिश भी की गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि ये सभी कदम इस ओर इशारा करते हैं कि सच सामने आने से पहले ही सबूतों को खत्म करने की कोशिश की गई।
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि वे इस मुद्दे को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि इस पूरे मामले में CBI जांच करवाई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जो भी दोषी हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर उत्तराखंड सरकार 10–12 दिनों के भीतर CBI जांच की घोषणा नहीं करती, तो पार्टी अंकिता को न्याय दिलाने के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेगी।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जब भी प्रधानमंत्री मोदी उत्तराखंड आते हैं, तो बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन ज़मीन पर इंसाफ नहीं दिखता। पार्टी का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री को वाकई उत्तराखंड की जनता और बेटियों की चिंता है, तो उन्हें इस मामले में शामिल सभी प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करनी चाहिए। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा बनाई गई SIT ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय गवाहों को डराया और सबूतों को कमजोर करने का काम किया।
वहीं दूसरी ओर, इन आरोपों पर भाजपा या राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मामला पहले ही जनता के बीच गहरी संवेदनशीलता और आक्रोश पैदा कर चुका है, और अब वायरल ऑडियो व नए आरोपों ने सरकार के लिए दबाव और बढ़ा दिया है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि फिलहाल ये सभी बातें आरोप और दावे हैं, जिनकी पुष्टि जांच एजेंसियों और अदालतों के जरिए होना बाकी है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। सवाल वही पुराना है—अंकिता को न्याय कब मिलेगा और क्या इस मामले में हर सच्चाई बेखौफ होकर सामने आ पाएगी? जनता की निगाहें अब सरकार की अगली कार्रवाई और जांच की दिशा पर टिकी हैं।




