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मोदी के बेहद कमजोर और दबाव में होने को लेकर एक अपडेट : मधुकेश्वर

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राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 अप्रैल 2026

यह चौंकाने वाली जानकारी मुझे एक ऐसे व्यक्ति से मिली है, जिसके पास प्रधानमंत्री के बारे में अंदरूनी जानकारी का बड़ा स्रोत है।
बुनियादी तथ्यों की पुष्टि कोई भी व्यक्ति गूगल सर्च करके कर सकता है।

जिस दिन मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद संभाला, उसी दिन 2011 से डॉ. मनमोहन सिंह के कैबिनेट सचिव रहे श्री अजीत कुमार सेठ एक मोटी फाइल लेकर “महामानव” से मिलने पहुंचे और कहा, “डॉ. साहब ने सुझाव दिया है कि आप इस फाइल को ध्यान से देखें।”

महामानव ने फाइल ली और जैसे-जैसे पन्ने पलटे, उनका चेहरा फीका पड़ गया, क्योंकि उस फाइल में उनके खिलाफ काफी सामग्री मौजूद थी। मोदी ने घबराकर पूछा, “यह आपके पास कैसे पहुंची?”

सेठ ने शांत स्वर में जवाब दिया, “कैबिनेट सचिव के तौर पर पीएमओ की सभी महत्वपूर्ण फाइलें मेरे पास आती हैं।”

मोदी जी ने चुपचाप फाइल लौटा दी और इशारा समझ गए। इसके बाद अजीत कुमार सेठ को सेवा विस्तार दिया गया और उन्हें मोदी जी का अपना कैबिनेट सचिव बना दिया गया!

इसका मतलब यह हुआ कि डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया जी को पीएमओ की गतिविधियों और फैसलों तक पहुंच बनी रही।
सेठ को 2014 में मोदी जी द्वारा एक्सटेंशन दिया गया और वे जून 2015 तक इस पद पर रहे।

क्या आपने दुनिया में कभी सुना है कि कोई प्रधानमंत्री अपने कट्टर विरोधी के सबसे भरोसेमंद अधिकारी को अपने पीएमओ का प्रमुख नियुक्त करे?

सेवानिवृत्ति के बाद सेठ को एक और इनाम दिया गया और उन्हें पब्लिक एंटरप्राइजेज सेलेक्शन बोर्ड (PESB) का चेयरमैन बना दिया गया।

शायद यही वजह है कि तमाम बड़े-बड़े दावों के बावजूद “56 इंच के महामानव” ने सोनिया जी, रॉबर्ट वाड्रा, चिदंबरम और अन्य लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिन पर उन्होंने विदेशी खातों समेत कई आरोप लगाए थे।

सिर्फ सोनिया जी ही नहीं, बल्कि देश और विदेश में कई लोगों के पास महामानव के कथित काले कारनामों की जानकारी है। इसी कारण मोदी जी भारत के सबसे असुरक्षित राजनेताओं में से एक माने जाते हैं और इसलिए वे अक्सर बड़े-बड़े दावे और बयानबाजी करते हैं।

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में भ्रष्ट नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन शायद ही कोई ऐसा नेता होगा जो खुद को संत के रूप में पेश करने के लिए इतना प्रयास करता हो, जितना “56 इंच” वाले करते हैं। इसी वजह से जनता को संबोधित करते समय उनकी आवाज में अक्सर उत्तेजना और खुद को निस्वार्थ महात्मा दिखाने का प्रयास दिखाई देता है।

रिकॉर्ड के लिए बता दूं कि जब 2014 के चुनाव प्रचार में मोदी जी ने पहली बार “56 इंच की छाती” की बात कही थी, तो मैंने उनसे व्यक्तिगत रूप से कहा था, “नरेंद्र भाई, ऐसा मत कहिए, यह अच्छा नहीं लगता।”

उनका जवाब था, “आम जनता को यह पसंद है, मधु जी। सिर्फ आप जैसे बुद्धिजीवी ही परिष्कृत भाषण चाहते हैं।”

अब मोदी जी के समर्थक, अपने “हृदय सम्राट” से पूछें कि उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह के कैबिनेट सचिव को अपने पीएमओ का शीर्ष अधिकारी क्यों बनाया?

जितना आप झूठे और आपत्तिजनक आरोप लगाकर मुझे उकसाएंगे, उतनी ही और जानकारी सामने आएगी, जो आपके “हृदय सम्राट” को बेनकाब करेगी।

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