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लगातार BLO की मौतों और भारी दबाव के बीच चुनाव आयोग झुका — बढ़ाई SIR की समय सीमा

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अवधेश कुमार । नई दिल्ली 11 दिसंबर 2025

चुनाव आयोग ने आखिरकार वह कदम उठा लिया जिसकी मांग कई राज्यों के अधिकारियों और ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे BLOs (बूथ लेवल अधिकारियों) द्वारा लगातार की जा रही थी। मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का काम पहले तय की गई तारीख पर पूरा कर पाना मुश्किल हो रहा था। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह थी—BLOs पर अत्यधिक दबाव, काम का बढ़ता बोझ और लगातार उनकी मौतों की सामने आती खबरें, जिसने पूरे तंत्र को झकझोर दिया। जनता और अधिकारियों की इस चिंताओं को देखते हुए चुनाव आयोग ने अब यूपी समेत छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में SIR की समय सीमा बढ़ा दी है।

नया शेड्यूल जारी करते हुए आयोग ने माना कि राज्य चुनाव कार्यालयों (CEOs) ने समय बढ़ाने का आग्रह किया था, क्योंकि कई जिलों में सत्यापन का काम तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रहा था। SIR के काम में BLOs को घर-घर जाकर दस्तावेज़ों की जांच, नाम जोड़ने-काटने के फॉर्म की पुष्टि और मतदाता सूची को अपडेट करना होता है। यह काम न सिर्फ भारी है बल्कि दिन-रात का दबाव भी ऐसा होता है कि कई BLOs थकान, तनाव और मानसिक दबाव की वजह से गंभीर हालात में पहुँच गए—कुछ की मौत की खबरें भी आईं। यह स्थिति इतनी गंभीर बन गई कि आयोग पर सवाल उठने लगे कि क्या वह ज़मीनी हकीकत को समझ रहा है या नहीं। अंततः आयोग को समय सीमा बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा।

नए शेड्यूल के अनुसार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार में SIR की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त दिन दिए गए हैं ताकि कोई भी पात्र मतदाता लिस्ट से बाहर न रह जाए। उदाहरण के तौर पर, यूपी में अब एन्यूमरेशन की तारीखें बढ़ा दी गई हैं और मतदाता सूची की ड्राफ्ट रिलीज भी आगे खिसक सकती है। कई राज्यों में फॉर्म भरने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर तक बढ़ाई गई है, जबकि ड्राफ्ट रोल दिसंबर के मध्य में जारी होंगे।

चुनाव आयोग का कहना है कि यह फैसला मतदाताओं की सुविधा और मतदाता सूची को और सटीक बनाने के लिए लिया गया है। लेकिन प्रशासनिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आयोग यह कदम तब उठा रहा है जब आलोचना तेज हो चुकी थी और BLOs की हालात पर उठ रही आवाज़ें अनदेखी करना मुश्किल हो गया था। विपक्ष ने भी SIR की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे अत्यधिक बोझिल, जल्दबाज़ी में लागू की गई और “मतदाता सूची में छेड़छाड़ की आशंका” बढ़ाने वाली प्रक्रिया बताया है। दूसरी तरफ आयोग का दावा है कि यह एक पारदर्शी और व्यवस्थित कार्य है जिसका उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि हर eligible नागरिक का नाम सही तरीके से दर्ज हो।

कुल मिलाकर, SIR की समय सीमा बढ़ाना एक व्यावहारिक और आवश्यक कदम माना जा रहा है—विशेषकर ऐसे समय में जब BLOs का स्वास्थ्य, सुरक्षा और कामकाजी दबाव चर्चा के केंद्र में है। अब देखना होगा कि बढ़ी हुई समयसीमा से मतदाता सूची का काम कितनी सहजता से पूरा हो पाता है और क्या इससे ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों का बोझ कुछ हल्का होता है या नहीं।

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