एबीसी नेशनल न्यूज | कोलंबो/वॉशिंगटन | 7 मार्च 2026
अमेरिका ने एक बार फिर अपनी साम्राज्यवादी नीति का काला चेहरा दिखाया है। ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को अमेरिकी पनडुब्बी से टॉरपीडो मारकर डुबोने के बाद अब वॉशिंगटन श्रीलंका पर खुला दबाव डाल रहा है कि वह डूबे जहाज के 32 बचे हुए नाविकों और दूसरे ईरानी जहाज IRIS Booshehr के 200+ चालक दल को ईरान वापस न भेजे। यह खुलासा अमेरिकी विदेश विभाग के एक आंतरिक केबल (मेमो) से हुआ है, जिसे रॉयटर्स ने देखा है। श्रीलंका की सरकार फिलहाल चुप है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक है। क्या कोलंबो अमेरिका के सामने घुटने टेकेगा या ईरान के साथ न्याय करेगा? दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं – क्योंकि यह सिर्फ नाविकों की वापसी का मामला नहीं, बल्कि अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई क्रूरता का सबूत है!
इस हमले में 87 ईरानी नाविक मारे गए, दर्जनों लापता हैं, और श्रीलंकाई नेवी ने बचाव अभियान चलाकर 32 घायल नाविकों को बचाया। ये सभी अब श्रीलंका में अस्पतालों में भर्ती हैं। दूसरी तरफ Booshehr (जो इंजन खराब होने के कारण फंसा था) के चालक दल को भी श्रीलंका ने हिरासत में ले लिया है। अमेरिका का साफ फरमान है – इन लोगों को “प्रोपेगैंडा” के लिए इस्तेमाल होने से रोकने के नाम पर तुरंत ईरान न भेजा जाए।
अमेरिकी दूतावास की चार्ज डी अफेयर्स Jayne Howell ने श्रीलंकाई अधिकारियों को सख्ती से कहा कि न तो Dena के सर्वाइवर्स और न ही Booshehr के क्रू को वापस भेजा जाए। यह दबाव ऐसे समय में आया है जब श्रीलंका खुद को तटस्थ घोषित कर चुका है, लेकिन अब वह दो तरफा दबाव में फंस गया है – एक तरफ अमेरिका का धमकी भरा रवैया, दूसरी तरफ ईरान जो अपने लोगों और शवों की वापसी की मांग कर रहा है।
यह घटना पश्चिम एशिया के युद्ध को अब हिंद महासागर तक ले आई है। अमेरिका-इजरायल गठजोड़ ने ईरान के खिलाफ अभियान को नया स्तर दिया है, जहां अब निहत्थे या व्यायाम से लौट रहे जहाजों को भी निशाना बनाया जा रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर श्रीलंका ने अमेरिकी दबाव में झुककर इन नाविकों को “बंदी” बनाकर रखा, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन होगा और क्षेत्रीय तनाव आग की तरह फैल सकता है।




