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देश बचाना है तो गठबंधन विस्तार जरूरी: नीतीश–नायडू को INDIA में लाओ, तभी टूटेगा वोट डकैतों का साम्राज्य

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आलोक कुमार  | नई दिल्ली 17 नवंबर 2025

भारत अब उस मोड़ पर आ चुका है जहाँ राजनीति सिर्फ सत्ता पाने की जद्दोजहद नहीं रही—यह देश को बचाने या देश को बेच देने के बीच का द्वंद्व बन चुका है। आज की सच्चाई यह है कि अगर विपक्ष एकजुट नहीं हुआ, अगर उसने समय रहते अपनी रणनीति नहीं बदली, अगर उसने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू जैसे अनुभवी, दृढ़ और प्रशासनिक समझ रखने वाले नेताओं को अपने साथ नहीं जोड़ा, तो यह देश धीरे-धीरे नहीं—तेज़ी से—एक ऐसी खाई में गिर जाएगा जहाँ से वापसी लगभग असंभव होगी। यह अब “राजनीति की लड़ाई” नहीं है, यह भारत के अस्तित्व की लड़ाई है। और इस लड़ाई को जीतने के लिए सिर्फ एक रास्ता है—इंडिया गठबंधन का विस्तार करो, INDIA को मजबूत करो, और वह शक्ति-संतुलन बनाओ जो आज के वोट डकैतों के साम्राज्य को ध्वस्त कर सके।

आज जो लोग नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को NDA का सहयोगी मानकर चैन की नींद सो रहे हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी किसी की सहयोगी नहीं—साबित इतिहास के अनुसार, वह अपने साथियों को खा जाने वाली पार्टी है। नवीन पटनायक कैसे खत्म हुए, एकनाथ शिंदे कैसे कब्ज़े में लिए गए, मणिपुर में एनपीपी कैसे टूटी, कर्नाटक में जेडीएस कैसे खोखली हुई—ये उदाहरण सिर्फ इतिहास नहीं, भविष्य की चेतावनी हैं। समय की मांग है कि नीतीश और नायडू यह समझें कि मुख्यमंत्री बने रहना ही जीत नहीं, देश को बचाना और लोकतंत्र को पुनर्जीवित करना उनका बड़ा कर्तव्य है। अगर वे NDA में बने रहे, तो देर-सबेर बीजेपी उन्हें भी पूरी तरह “निगल” जाएगी। इसलिए आज का सबसे महत्वपूर्ण कदम यही है कि वे INDIA गठबंधन में वापस आएँ और केंद्र में एक नई, मजबूत, सर्वमान्य और जनादेश-आधारित सरकार के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएँ।

यह स्थिति अचानक नहीं बनी है। इसकी जड़ें उन घटनाओं में हैं जिन्होंने पूरे देश को हिला दिया—हरियाणा में 25 लाख वोटों की चोरी, महाराष्ट्र में 65 लाख वोटों की लूट, और बिहार में तो लोकतंत्र की रीढ़ ही तोड़ दी गई—जहाँ 67 लाख वोटरों को डिलीट कर दिया गया और 33 लाख वोटर सत्ता की जेब में ठूंस दिए गए। यह कोई गलती नहीं, कोई तकनीकी त्रुटि नहीं—यह एक संगठित, योजनाबद्ध और अत्यधिक खतरनाक लोकतांत्रिक अपराध है। यह वह अपराध है जिसमें जनता की आवाज़ को नहीं, बल्कि सर्वर रूम के अंधेरे कोठरियों को सत्ता का स्रोत बनाया गया। यह वह अपराध है जिसमें वोटरों की सूची नहीं, लोकतंत्र की आत्मा ही काट दी गई। ऐसे समय में विपक्ष अगर पुराने ढर्रे पर लड़ता रहा, तो वह किसी भी चुनाव में जीत नहीं सकेगा—क्योंकि चुनाव अब मैदान में नहीं, मशीनों और डेटा-फाइलों में लड़े जा रहे हैं।

कांग्रेस या राजद को आत्ममंथन की नसीहत देने वाले लोग, जो खुद हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में लोकतांत्रिक गिरावट की मिट्टी में सने हुए थे, आज भी वही गीत गाते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि आत्ममंथन विपक्ष नहीं, सत्ता पक्ष को करना चाहिए जिसने पूरे देश को लोकतांत्रिक लुटेरों का खेल का मैदान बना दिया है। जब सरकारें चोरी करके बनानी हों, जब परिणाम पहले से तय हों, जब सर्वर की छाया मतपेटी पर भारी पड़े—तो विपक्ष चाहे जितनी जनसभाएँ कर ले, चाहे जितने वोट ले आए, वह कभी सत्ता तक नहीं पहुँच पाएगा। यह खेल इतना बड़ा, इतना विशाल और इतना संगठित है कि इसे सिर्फ एक चमत्कार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की संयुक्त राजनीतिक क्रांति ही रोक सकती है।

इसीलिए INDIA गठबंधन का मूल ढांचा बदलना ज़रूरी है। यह सिर्फ कांग्रेस, राजद या आप का मोर्चा नहीं हो सकता। इस गठबंधन को अपनी रीढ़, अपना असली धुरी-स्तंभ तभी मिलेगा जब नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू इसमें शामिल होंगे। दोनों अनुभवी हैं, दोनों स्वीकार्य हैं, दोनों राष्ट्रीय स्तर पर भरोसे के प्रतीक हैं, और दोनों के पास वह राजनीतिक भविष्यदृष्टि है जो इस चुनावी तानाशाही को चुनौती दे सकती है। इन दोनों नेताओं को यदि संयुक्त नेतृत्व में जगह दी जाए—चाहे पीएम या डिप्टी पीएम के रूप में—तो सत्ता की पूरी संरचना हिल जाएगी। और ममता बनर्जी जैसी दृढ़ नेता को गृह मंत्रालय देकर केंद्र की एजेंसियों पर चल रही निर्लज्ज गुंडागर्दी पर तत्काल रोक लगाई जा सकती है। यह कोई राजनीतिक तुष्टिकरण नहीं—यह लोकतंत्र का पुनर्जन्म है।

और याद रखिए—जिस दिन नीतीश–नायडू–ममता INDIA गठबंधन की असली शक्ति बन जाएंगे, उसी दिन वोट चोरी का यह साम्राज्य पहली बार कांपेगा। उसी दिन वोट डकैती का सरगना जनता के सामने घुटनों के बल गिरेगा। उसी दिन चुनाव आयोग की नकली दादागीरी हवा में उड़ जाएगी। उसी दिन डिजिटल लूट का खेल हमेशा के लिए खत्म होगा और जनता की संपत्ति, जनता की ताक़त और भारत का भविष्य कॉरपोरेट दलालों के पंजों से निकलकर जनता के हाथ में वापस आएगा।

लेकिन अगर यह गठबंधन नहीं बनता—अगर विपक्ष फिर से वही पुरानी गलती दोहराता है—तो देश बिकेगा, जनता लुटेगी, युवाओं की ज़िंदगी बेरोजगारी की आग में जलेगी, शिक्षा बर्बाद होगी, स्वास्थ्य ढहेगा, किसान आत्महत्या करेगा और भारत का लोकतंत्र दुनिया की सबसे बड़ी विफलता बनकर इतिहास में दर्ज हो जाएगा। इस देश को बचाने का समय यही है—अभी—तुरंत। विपक्ष को एक ऐसा आघात, एक ऐसी रणनीति, एक ऐसी एकता दिखानी होगी जो आज के तानाशाही मॉडल को जड़ से हिला दे।

अगर अब भी विपक्ष एक नहीं हुआ, तो याद रखिए—लोकतंत्र को वोट डकैतों ने खत्म नहीं किया होगा, बल्कि विपक्ष की कमजोरी, बिखराव और निष्क्रियता ने खत्म होने दिया होगा। इतिहास में यही लिखा जाएगा—कि जब देश को बचाने का समय आया, तब सत्ता नहीं, विपक्ष सो गया था।

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