नई दिल्ली 13 नवंबर 2025
दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके में 13 लोगों की मौत के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं, और इसी जांच की कड़ी में नाम सामने आने के बाद फरीदाबाद स्थित Al Falah University अब शिक्षा और सुरक्षा—दोनों मोर्चों पर सवालों के घेरे में है। रेड फोर्ट ब्लास्ट की जांच के दौरान विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों, परिसर से जुड़े मूवमेंट और संभावित लिंक की पड़ताल ने इस संस्थान को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों का फोकस बढ़ा ही था कि इसी बीच विश्वविद्यालय के खिलाफ एक दूसरा बड़ा विवाद भी सामने आ गया—एक ऐसा विवाद जो सीधे-सीधे शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रहार करता है।
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने अल-फालाह यूनिवर्सिटी को ‘फर्जी मान्यता दावा’ करने पर एक सख्त शो-कॉज़ नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट और प्रचार सामग्री में दावा किया कि उसे “NAAC ग्रेड A” प्राप्त है, जबकि वास्तविकता बिल्कुल अलग है। NAAC के रिकॉर्ड के अनुसार, अल-फालाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की मान्यता 2018, और अल-फालाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग की मान्यता 2016 में ही समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद संस्था ने वर्षों तक इन दावों को जारी रखा, जिससे छात्रों, अभिभावकों और शैक्षणिक समुदाय को गुमराह किया गया। यह केवल भ्रामक विज्ञापन नहीं, बल्कि शिक्षा जगत में भरोसे के बड़े संकट का संकेत है।
NAAC ने नोटिस में चेतावनी दी है कि इस तरह की गलत जानकारी न सिर्फ एक गंभीर उल्लंघन है बल्कि विश्वविद्यालय को भविष्य में किसी भी मूल्यांकन या मान्यता प्रक्रिया में शामिल होने से रोका जा सकता है। इसके साथ ही, यह भी कहा गया है कि इस मामले की जानकारी आगे UGC और अन्य नियामक संस्थाओं के पास भेजी जाएगी, ताकि आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में संस्थानों का इस तरह मानदंडों से खिलवाड़ करना पूरे क्षेत्र की विश्वसनीयता को दागदार बनाता है—और अब इस घटना ने उस खतरे को देश के सामने साफ-साफ उजागर कर दिया है।
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि NAAC की कार्रवाई उस वक़्त हुई है जब विश्वविद्यालय का नाम रेड फोर्ट धमाके की जांच में सामने आ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा है कि उसके किसी भी विभाग या परिसर में कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं हुई, और जिन व्यक्तियों की बात हो रही है उनका संबंध केवल “औपचारिक रोजगार” तक सीमित था। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ा संकेत है—कि निजी शैक्षणिक संस्थानों की निगरानी, सत्यापन और पारदर्शिता को और कठोर बनाने की आवश्यकता है।
यह पूरा प्रकरण केवल एक संस्थान का विवाद नहीं, बल्कि यह बताता है कि जब नियमन ढीला पड़े और जवाबदेही कमजोर हो जाए, तो शिक्षा भी जोखिम में पड़ती है और सुरक्षा भी। NAAC का नोटिस और धमाके की जांच—दोनों मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि देश को तत्काल, कठोर और स्पष्ट निगरानी व्यवस्था की जरूरत है, ताकि न शिक्षा का भरोसा टूटे और न राष्ट्र की सुरक्षा खतरे में पड़े।




