एबीसी नेशनल न्यूज | लखनऊ | 7 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी लगातार पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) समाज से आने वाले नेताओं का अपमान कर रही है और उन्हें हाशिए पर धकेलने की राजनीति कर रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन हुआ था और उस दौर में सपा चाहती थी कि मायावती देश की प्रधानमंत्री बनें। उन्होंने कहा कि उस समय गठबंधन की राजनीति का मकसद दलित नेतृत्व को मजबूत करना और देश की राजनीति में सामाजिक संतुलन कायम करना था।
उन्होंने आगे कहा कि जब इंडिया गठबंधन बना तो उस समय भी कई विपक्षी दलों की सहमति से यह विचार सामने आया था कि नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाया जाए। अखिलेश यादव के मुताबिक उस समय विपक्षी दल मिलकर देश में एक मजबूत वैकल्पिक नेतृत्व तैयार करना चाहते थे।
बिहार के चुनाव का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने उस समय मजाकिया अंदाज में कहा था कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनकर रिटायर नहीं होंगे बल्कि मुख्यमंत्री बनकर रिटायर होंगे। लेकिन अब जो हालात बन रहे हैं, उससे लगता है कि बीजेपी उन्हें राज्यसभा के रास्ते राजनीति से रिटायर करने की तैयारी कर रही है।
अखिलेश यादव ने इस दौरान मीडिया से सवालिया लहजे में कहा कि आप लोग ही बताइए—पांच बड़ा होता है या सात? केंद्रीय मंत्री बड़ा होता है या राज्यमंत्री? प्रदेश अध्यक्ष बड़ा होता है या राष्ट्रीय अध्यक्ष? उन्होंने कहा कि इन उदाहरणों से समझा जा सकता है कि बीजेपी किस तरह से नेताओं की हैसियत और सम्मान को कम करने की कोशिश करती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की राजनीति का उद्देश्य पीडीए के नेताओं को कमजोर करना है, जबकि समाजवादी पार्टी हमेशा सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व की लड़ाई लड़ती रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी आगे भी पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखेगी।




